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    हादसे में रिया ने खोया हाथ, अब पैर बचाने के लिए लड़ रही जंग

    Published: Wed, 12 Oct 2016 03:57 AM (IST) | Updated: Wed, 12 Oct 2016 03:57 AM (IST)
    By: Editorial Team

    0 छत में खेलते समय आई थी करंट की चपेट में

    0 झुलसा था बायां हाथ, इंफेक्शन रोकने डॉक्टरों ने काटा

    0 अब पैर बचाने की जद्दोजहद, मजदूर पिता को दो लाख रुपए की जरूरत

    रायपुर,निप्र।

    अस्पताल के बेड में 6 साल की रिया को एक हाथ से मोबाइल में गेम खेलते देख कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि उसने एक हाथ खो दिया है। लेकिन बगल में बैठे उसके माता-पिता की आंखों में आंसू देख कर उनके दर्द का अंदाजा लगाया जा सकता है। रिया के दाएं पैर में भी पट्टियां बंधी हुई हैं। पूछने पर उसके पिता संतोष बताते हैं- हादसे के बाद डॉक्टर ने हाथ तो काट दिया, पर पैर में इंफेक्शन फैल रहा है, हड्डियां खराब हो रहीं है, जिन्हें बचाने में कम से कम दो लाख रुपए का खर्च आएगा। बेटी के इलाज के लिए छुट्टी लेने के कारण अब ठेकेदार ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया है। आर्थिक रूप से वे पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। रिया को बचाने के लिए रायपुर के लोगों से मदद की आस है।

    नईदुनिया की टीम ने कालड़ा नर्सिंग होम के कमरा नंबर 311 में भर्ती रिया के पिता से बात कर उनका दर्द साझा करने का प्रयास किया। गेवरा निवासी संतोष केवट ने बताया- 5 जुलाई को मैं कोल वॉशरी में काम करने गया था। पत्नी मंगला और बेटी रिया घर में थीं। इस बीच रिया मोहल्ले के बच्चों के साथ घर की छत में खेलने चली गई। छत के ऊपर से 11 हजार वॉट का बिजली का तार गुजरता है। कुछ देर बाद अचानक रिया के चीखने की आवाज आई। मंगला दौड़ कर ऊपर गई। देखा, रिया छत में बेहोश पड़ी थी। बायां हाथ, दायां पैर और सर बुरी तरह से झुलस चुका था। साथ खेल रहे बच्चों ने बताया कि रिया छत की बाउंड्री वॉल पर बैठी थी, दीवार गीली होने के कारण वह फिसलने लगी। गिरने से बचने के लिए उसने बिजली का तार पकड़ लिया और करंट की चपेट में आ गई।

    डॉक्टर कालड़ा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने मानवता दिखाते हुए डॉक्टरी और कमरे का खर्च माफ कर दिया है, लेकिन पैर का इंफेक्शन साफ करने तथा ड्राफ्िटग करने पर कम से कम दो लाख रुपए का खर्च आएगा।

    पुलिस अफसर बनना चाहती है रिया-

    6 साल की रिया नईदुनिया टीम से बातचीत के दौरान लगातार हंसती मुस्कराती रही। शायद उसे यह अंदाजा नहीं है कि उसने अपना एक महत्वपूर्ण अंग खो दिया है। पूछने पर रिया कहती है- मैं बड़ी होकर पुलिस अफसर बनूंगी। वहीं मां का कहना है- हादसे में बेटी की जान बच गई, हमारे लिए यही काफी है। आगे के इलाज के लिए रिया के मां-बाप लोगों से मदद की आस लगाए बैठे हैं।

    11 शुक्ला 01, समय 5.54

    सं. आरकेडी

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