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    छत्तीसगढ़ में 3 परिवार ऐसे, जिनमें कैंसर भी वंशानुगत बीमारी, जानिए क्यों

    Published: Fri, 23 Jun 2017 08:01 AM (IST) | Updated: Fri, 23 Jun 2017 09:10 PM (IST)
    By: Editorial Team
    cancer patient 2017623 92747 23 06 2017

    रायपुर। अब तक तो आपने यही सुना होगा कि कैंसर वंशानुगत नहीं होता, लेकिन मेडिकल रिसर्च में इसके भी शुगर की तरह वंशानुगत होने की पुष्टि हो चुकी है। प्रदेश में 3 परिवार ऐसे मिले हैं, जिनमें जीन (वंशाणु) को कैंसर का कारक पाया गया है। इन परिवार में युवा, बच्चे भी पीड़ित हैं, जिनका निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

    हालांकि वंशानुगत कैंसर मरीजों की संख्या बहुत कम है। कुल कैंसर मरीजों के 10 से 15 फीसदी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अब यह आंकड़ा इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि डॉक्टरों ने युवा कैंसर मरीजों की जेनेटिक जांच शुरू कर दी है।

    सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में सालाना लगभग 40 हजार मरीज पहुंचते हैं।'नईदुनिया' ने वंशानुगत कैंसर पर पड़ताल की। ओंकोसर्जन, ओंकोलॉजिस्ट से बात की। इनका कहना है 30-40 साल की उम्र में कैंसर होता है तो मरीजों की हिस्ट्री ली जाती है।

    पूछा जाता है कि परिवार में या ब्लड रिलेशन में किसी को कैंसर तो नहीं था। जवाब हां होने पर माना जाता है कि वह जीन की वजह से शिकार हुआ। ऐसे मरीज अगर विवाहित हैं तो उनके बच्चों का जेनेटिक टेस्ट होना ही चाहिए। हालांकि बहुत कम डॉक्टर ही यह टेस्ट करवाते हैं। अधिकांश डॉक्टर तो मरीज की सर्जरी, कीमोथैरेपी ही करते हैं। कई बार परिवार के सदस्य ही जांच नहीं करवाते।

    वे कैंसर जो वंशानुगत होते हैं- ओवरी का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जीन की वजह से हो सकते हैं। इनके होने की संभावना 10 फीसदी है। इनका स्वरूप बदल सकता है, ये महिला-पुरुष में दूसरे कैंसर के रूप में जन्म ले सकते हैं। गर्भवती मां से उसके नवजात शिशु को रेहिनोब्लास्टिमा (आंख का कैंसर) कॉमन है।

    18 साल से कम उम्र की जांच नहीं होती- मेडिकल एथिक्स रूल्स के मुताबिक ओवरी और ब्रेस्ट कैंसर टेस्ट के लिए 18 साल की उम्र पार होना अनिवार्य है। क्योंकि जिसकी जांच कर रहे हैं उसकी सहमति भी अनिवार्य है। नियम इतने सख्त हैं कि मरीज की सहमति के बगैर डॉक्टर उसकी कैंसर रिपोर्ट परिवार के सदस्यों तक से साझा नहीं कर सकते।

    जेनेटिक टेस्ट से चलता है पता-

    हमारे शरीर में जीन की संख्या लाखों में है। विशेषज्ञ, चिकित्सकों के मुताबिक 40 जीन से कैंसर हो सकता है, इन पर शोध हो चुका है। 100 और जीन संदिग्ध हैं, जो कैंसर कारक हो सकते हैं। इनका पता जेनेटिक टेस्ट से चल सकता है। फिलहाल यह सुविधा छत्तीसगढ़ के 1-2 सेंटर में ही है।

    अंबेडकर अस्पताल में कैंसर सर्जरी व थैरेपी यूनिट हैं, लेकिन इस टेस्ट की सुविधा नहीं है। यहां लैब स्थापित करने की कवायद जारी है। इसकी जांच का खर्च 3 हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक है। यह ओंकोसर्जन, ओंकोलॉजिस्ट की समझ पर निर्भर है कि वे कौन सा जीन टेस्ट को करवाने की सलाह दे रहे हैं।

    3 सैंपल पॉजिटिव

    कुछ फैमली हैं, जिनका हम इलाज कर रहे हैं। कानूनी प्रावधान है, उनके संबंध में हम जानकारी नहीं दे सकते। आपको इतना जरूर बता सकता हूं कि 15 सैंपल जेनेटिक टेस्ट के लिए भेजे थे, जिनमें 3 पॉजिटिव हैं। - डॉ. अनिकेत ठोके, ओंकोलॉजिस्ट, संजीवनी कैंसर हॉस्पिटल, रायपुर

    इसलिए ली जाती है मरीज की हिस्ट्री

    किसी युवा को कैंसर है तो उसकी हिस्ट्री लेते हैं। संभव है कि उसे उसके परिवार के किसी सदस्य या फिर माता-पिता के जीन से कैंसर मिला हो। जेनेटिक टेस्ट में कैंसर की पुष्टि होने के बाद तत्काल इलाज करने से व्यक्ति संपूर्ण जीवन जी सकता है। - डॉ. आशुतोष गुप्ता, यूनिट हेड, ओंकोसर्जरी, डॉ. अंबेडकर अस्पताल

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