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    नहीं मिली बार कोड मशीनें, अब शराब दुकानों में रसीद अभी नहीं

    Published: Wed, 13 Sep 2017 11:43 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 11:43 PM (IST)
    By: Editorial Team

    राजनांदगांव। शराब दुकानों में ग्राहकों को खरीदी के बाद रसीद देने वाली नई व्यवस्था फिलहाल अटक गई है। आबकारी विभाग को इसके लिए जरूरी बार कोड मशीनें अब तक नहीं मिल पायी। बताया जा रहा है कि मशीनें सितंबर के अंत तक मिल पाएगी। हालांकि रायपुर और दुर्ग में इस तरह की नई व्यवस्था माहभर पहले ही लागू हो चुकी है।

    शराब की कीमतों में मनमानी पर ब्रेक लगाने रसीद सिस्टम शुरू की जानी है। इसके लिए आबकारी विभाग को इसी माह बार कोडिंग मशीन मिलने वाली थी। लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते मशीनें नहीं आ पायी। बताया गया कि हर बोतल पर बार कोड होगा जिसे ट्रेस करने के बाद आटोमेटिक रसीद निकलेगी। इससे कीमतों में मनमानी और चिल्लर के झंझट से छुटकारा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

    हर दुकान में कम से कम दो

    जिले में कुल 28 शराब दुकानें हैं। हर दुकान में कम से कम दो बार कोड मशीनें रहेंगी। ज्यादा भीड़ वाली दुकानों में मशीनों की संख्या तीन या चार भी हो सकती है। पूरा सिस्टम शापिंग मॉल्स जैसा ही रहेगा। यानी किसी भी तरह के सामान खरीदने पर जिस तरह बिलिंग की जाती है, ठीक उसी तरह शराब दुकानों में भी सिस्टम बिठाया जाना है। शराब की हर बोतल पर बार कोड रहेगा। कोडिंग मशीन से उस कोड को ट्रेस किया जाएगा। यह मशीन कंप्यूटर से कनेक्ट रहेगी और आबकारी की वेबसाइट से जुड़ी होने के कारण आनलाइन भी रहेगी। कोड के ट्रेस होने के बाद ट्रिगर दबाते ही आटोमेटिक रसीद प्रिंट होकर निकल जाएगी। ग्राहकों को वह रसीद तुरंत दे दी जाएगी।

    प्रशिक्षित किए जाएंगे कर्मचारी

    बताया गया कि दुकानों के कर्मचारियों को बार कोड मशीन आपरेट करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। एक मशीन के पीछे तीन कर्मी ट्रेंड होंगे। ताकि किसी एक की अनुपस्थिति में दूसरा कर्मचारी उसे आपरेट कर सके। बार कोडिंग मशीन का कनेक्शन सीधे आनलाइन रहेगा। शराब की कीमत कम-ज्यादा होने पर उसे आसानी से अपडेट किया जा सकेगा। यानी अगर पुरानी रेट वाली शराब होने के बाद भी आनलाइन सिस्टम होने के कारण ग्राहकों को नई दर पर ही शराब मिला करेगी।

    माह के अंत तक

    'रायपुर व दुर्ग की कुछ दुकानों में बार कोडिंग मशीनें प्रयोग के तौर पर लगाई गई है। प्रयोग सफल रहा। कुछ तकनीकी सुधार की जरूरत है। इस कारण यहां मशीनें नहीं आ पायी है। सितंबर के अंत तक मशीनें आने की पूरी संभावना है।'

    -विजयसेन शर्मा, सहायक आयुक्त, आबकारी

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