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    गैस कनेक्शन 40 हजार और मात्र 32 ने छोड़ी सब्सिडी

    Published: Sat, 04 Apr 2015 12:45 AM (IST) | Updated: Sat, 04 Apr 2015 02:32 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    राजनांदगांव। संपन्न लोगों से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम से यहां के भाजपाई ही नहीं जुड़ पा रहे हैं। धनाड्य नेताओं ने स्वेच्छा से सब्सिडी वाली गैस छोड़ना तो दूर लोगों को इसके लिए प्रेरित करने का भी कोई प्रयास अब तक नहीं किया। यही कारण है कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के निर्वाचन क्षेत्र में अब तक 40 हजार में से मात्र 32 ग्राहकों ने ही सस्ती गैस नहीं लेने की सहमति जताई है।

    पीएम की मंशा के अनुरूप भाजपा नेता भी खरे नहीं उतर पा रहे हैं। दरअसल पीएम ने सभी धनाढ्य लोगों से अपील की है कि वे गैस में मिलने वाली सब्सिडी छोड़ दें। स्क्रोल ऑफ आनर याने गैस में सब्सिडी नहीं लेने का यह कदम देश के हित में होगा।

    इसके विपरीत गैस की सब्सिडी छोड़ने का कोई नाम नहीं ले रहा हैं। यहां तक कि भाजपा नेता भी सब्सिडी का मोह नहीं छोड़ रहे हैं। पिछले दो माह में मात्र 32 लोगों ने सब्सिडी छोड़ी है। जबकि शहरी क्षेत्र में कुल गैस उपभोक्ता 40 हजार से भी अधिक हैं। सब्सिडी वाली गैस लेने वालों में ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो आसानी से इसे त्याग सकते हैं। सत्ताधारी दल भाजपा के अधिकांश नेता इस श्रेणी में आते हैं।

    नवाजे जाएंगे ऐसे लोगः

    प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के अमीर गैस उपभोक्ताओं से अपील की थी कि वे देश हित के लिए गैस में मिलने वाली सब्सिडी न लें। अर्थात गैस की सब्सिडी में मिलने वाली रकम न ले। यदि ऐसा अमीर उपभोक्ता करते हैं, तो उन्हें स्क्राल ऑफ ऑनर से नवाजा जाएगा। इसके विपरीत जिले के करोड़पति उपभोक्ता भी गैस की सब्सिडी लेने का लालच नहीं छोड़ पा रहे हैं।

    मात्र 32 ने छोड़ीः

    इंडेन गैस एजेंसी एवं एचपी गैस एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में कुल 40 हजार 500 उपभोक्ता हैं। इनमें इंडेन के 22 हजार और एचपी के 18 हजार 500 कनेक्शनधारी हैं। इसमें से मात्र 32 लोगों ने गैस कनेक्शन में मिलने वाली सब्सिडी नहीं लेने आवेदन दिया है। एचपी गैस के कुल 20 अमीर उपभोक्ताओं ने सब्सिड़ी लेने से मना किया। वहीं इंडेन गैस के 12 उपभोक्ता पीएम मोदी की मुहिम से जुड़ पाए हैं।

    नहीं छूट रहा मोहः

    नांदगांव में भाजपा सहित कांग्रेस व कुछ अन्य पार्टियों के नेता भी करोड़पति हैं। इनमें भाजपा नेताओं की तो बात ही कुछ और है। पिछले साल पीडीएस घोटाला सामने आया था। उसमें भाजपा के ही कई नेताओं का नाम फूटा था। उनके और उनके रिरिश्तेदारों के नाम बीपीएल कार्ड मिले थे। बाद में शासन-प्रशासन के दबाव के पर कार्ड सरेंडर किए थे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि 1 रुपए किलो वाला चावल भी नहीं छोड़ने वाले सत्ताधारी गैस में लगभग आधी कीमत वाली सब्सिडी कैसे छोड़ देंगे। यही कारण है कि भाजपा नेता ही अपने प्रधानमंत्री की बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शहरी क्षेत्र में एक भी भाजपा नेता ने अब तक गैस कनेक्शन नहीं छोड़ा हैं।

    कलेक्टर ने छोड़ी थी सब्सिडीः

    गैस सब्सिडी छोड़ने की पहल सबसे पहले तत्कालीन कलेक्टर अशोक अग्रवाल ने की थी। लगभग 2 माह पूर्व श्री अग्रवाल ने गैस में मिलने वाली सब्सिडी छोड़ दी थी। साथ ही अन्य अधिकारियों, व्यापारियों, नेताओं सहित सभी अमीरों से गैस सब्सिडी छोड़ने अपील की। बावजूद इस ओर अधिकारी और व्यापारी भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं।

    यहां कुल तो लगभग 22 हजार गैस उपभोक्ता हैं। इनमें से 12 लोगों ने ही गैस सब्सिडी छोड़ी है। इनमें कोई नेता तो नहीं है।

    - नरेंद्र डाकलिया, एजेंसी संचालक, इंडेन गैस

    कुल गैस कनेक्शनधारी 18 हजार से अधिक है। इनमें से लगभग 20 लोगों ने सब्सिडी छोड़ी है। यह सभी व्यापारी वर्ग से हैं।

    - चंद्रकांत चतवानी, एजेंसी संचालक, एचपी गैस

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