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    मीडिल स्कूल में बच्चे पढ़ा रहे बच्चों को

    Published: Thu, 01 Jan 2015 11:16 PM (IST) | Updated: Thu, 01 Jan 2015 11:16 PM (IST)
    By: Editorial Team
    jan1r6 01 01 2015

    मदन रामटेके. राजनांदगांव

    शहर सहित जिले भर की सरकारी मीडिल स्कूलों में शिक्षकों का टोटा हो गया है। पिछले 7 - 8 साल से मीडिल स्कूलों में शिक्षाकर्मियों की भर्ती पर बैन लगा है। इसके अलावा वर्ग तीन में पदस्थ शिक्षाकर्मियों को वर्ग दो में पदोन्नत करने पर भी बैन लगा है। हालत यह है कि मीडिल स्कूल में पढ़ाई कराने किसी भी तरह से एडजस्टमेंट करते हुए प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को भेजा जा रहा है। वह भी पर्याप्त रूप से नहीं। प्राइमरी के भी दो-तीन शिक्षकों के भरोसे मीडिल स्कूल की कक्षाएं चल रही है। विडंबना यह है कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक को पढ़ाने के लिए प्राइमरी स्कूल के ऐसे शिक्षकों को भेजा गया है जो पहली या दूसरी, तीसरी पढ़ाते हैं। ऐसे में शिक्षा का स्तर क्या होगा? 'नईदुनिया' ने ऐसे स्कूलों की लाइन रिपोर्टिंग की।

    शहर में 8वीं के बच्चे ही 6वीं के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षक नहीं होने पर एवं खाली पीरियड में सीनियर बच्चों को जूनियर बच्चों को सम्हालने का जिम्मा दे दिया जाता है। यह स्थिति शहर में ही है। गांवों का क्या हाल होगा? इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। दोपहर में 'नईदुनिया' की टीम सदरबाजार मीडिल स्कूल पहुंची। यहां कक्षा 6वीं के एक कमरे में सारे बच्चे बैेठे थे। शिक्षक के स्थान पर एक सीनियर छात्र पढ़ा रहा था। बच्चों ने बताया कि शिक्षक अभी नहीं है। इसलिए एक छात्र द्वारा ही छात्रों को पढ़ाने का जिम्मा एक शिक्षक ने उन्हें दिया है। यह ढर्रा रोज यहां चलता है।

    पढ़ाई में बेहद कमजोर

    जब कक्षा 8वीं के एक छात्र से बातचीत की गई तो और भी आश्चर्य हुआ। बच्चे को 3 का पहाड़ा ही नहीं आता। यहां के अधिकांश बच्चों को 2 तक ही पहाड़ा आता है। 3 के बाद का पहाड़ा कुछ बच्चे अटक-अटक कर बता तो देते हैं लेकिन पूरी तरह नहीं बता पाते।

    कमजोर है सर बच्चे

    वहां पढ़ाई करा रहे शिक्षक गफ्फार खान ने 'नईदुनिया' को बताया कि यहां के बच्चों को पढ़ाने में बेहद कठिनाई हो रही है। 6वीं से लेकर 8वीं तक के बच्चों को पढ़ाना काफी मुश्किल काम है। उनके अनुसार अभी भी इन्हें न चाहते हुए भी प्राइमरी की जानकारी और पहाड़ा याद कराना पड़ रहा है। सदरबाजार मीडिल स्कूल में 6 लोगों का स्टाफ सेटअप के अनुसार होना चाहिए। लेकिन यहां शिक्षक दो ही हैं। शिक्षक पर्याप्त नहीं होने के चलते मुश्किल हो रही है।

    जिले में 3 हजार रिक्त

    शिक्षा विभाग के अनुसार मीडिल स्कूल में शिक्षकों के पद बड़े पैमाने पर रिक्त हैं। 3 हजार 156 पद पद रिक्त हैं। 7-8 सालों से यही हाल है। यह पद इसलिए भी रिक्त है क्यांेंकि पिछले 7-8 सालों से शिक्षकों की भर्ती पर बैन लगा है। शिक्षाकर्मियों के वर्ग दो पर सीधी भर्ती बंद हैं। यही नहीं वर्ग तीन के योग्य शिक्षाकर्मियों को पदोन्नति देकर वर्ग दो में भी नहीं लाया जा सकता।

    वर्सन

    मीडिल स्कूल में वास्तव में शिक्षकों की समस्या है। ढाई तीन हजार पद रिक्त हैं। सालों से शिक्षाकर्मी वर्ग 2 की भर्ती पर बैन लगा है इसमें प्रशासन क्या कर सकता है। प्राइमरी के शिक्षकों काो यहां वहां अटैचमेंट कर मीडिल स्कूल में भेजा जा रहा है।

    बीएल कुर्रे, डीईओ

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