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    अब यहां हाथी गांव में आकर खटखटाने लगे हैं दरवाजा

    Published: Fri, 08 Dec 2017 12:33 AM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 10:33 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    कोरबा । अब तक हाथियों को लहलहाती फसल चट करने खेतों और गांव में सरेआम घुसकर तोड़-फोड़ करने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार हाथियों का एक झुंड आधी रात चुपचाप गांव की गलियों में घूमता पाया गया। एक ग्रामीण जब खाना खाकर बाहर निकला, तो झुंड से अलग एक हाथी घर के दरवाजे पर ही खड़ा मिला। उसने देखते हुए सूंड़ से पकड़ लिया और पड़ोसी की दीवार पर दे मारा।

    वह सदमे से बेहोश होकर वहीं पड़ा रहा, जिसे हाथी ने अपनी सूंड़ से कुछ देर सूंघकर जानने का प्रयास किया कि वह जिंदा है या नहीं। इस बीच गांव में करीब 18 हाथियों का झुंड घूम रहा था। घटना के बाद बेसुध ग्रामीण को वहीं छोड़ दंतैल झुंड समेत गांव से बाहर निकलकर जंगल में गुम हो गया।

    ग्रामीण के हाथी की सूंड़ से जकड़कर बच निकलने की यह घटना बाल्को वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम बेलाकछार की है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर यह गांव स्थित है। यहां रहने वाले जेठूराम यादव (55) पिता बिसाहू यादव का बुधवार-गुरूवार की दरम्यानी रात एक हाथी से सामना हो गया।

    हाथी उसे वहां मिला, जहां कभी जीवन में भी उसने कल्पना नहीं की थी। बुधवार की रात उसने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रात को भोजन किया और अपनी रोज की आदत के अनुरूप आंगन से लगे गोठान में बंधे मवेशियों की देखने घर से निकला।

    सोने से पहले मवेशियों का चारा और ठंड से बचने के इंतजाम का जायजा लेने वह इसी तरह रोज खाने के बाद कुछ देर वहीं रहता है। पर बुधवार की रात वह जैसे ही घर से बाहर निकलकर खड़ा हुआ, अचानक सामने एक हाथी को सामने ही खड़े पाया।

    इससे पहले की वह भागकर अपनी जान बचाता या किसी को मदद के लिए पुकारता, हाथी ने उसे अपनी सूंड़ से लपेट कर उठा लिया और पड़ोस के घर की दीवार पर पटक दिया।

    बेहोश ग्रामीण को आधे घंटे खोजते रहे

    अचानक अपने सामने विशालकाय जंगली हाथी को देख ग्रामीण पहले ही सदमें में था, जिसके बाद दीवार पर पटकने से लगी चोट की वजह से उसके होश गुम हो गए। इस घटना से ग्रामीण वहीं चित हो गया और करीब आधे घंटे तक वहीं पड़ा रहा।

    उसकी आवाज सुनकर परिजन बाहर निकले और ढूंढ़ने लगे। इधर गांव के अन्य लोगों को भी हाथियों की आमद का आभास हुआ। घर के एक ओर परिजन उसे तलाश रहे थे, तो दूसरी ओर से आ रहे ग्रामीणों ने उसे दीवार के पास बेहोश पाया।

    इसके बाद वन विभाग को खबर की गई और संजीवनी 108 एंबुलेंस की मदद से ग्रामीण को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। यहां कचांदी नाला भी बेलाकछार के करीब ही स्थित है, जहां अक्सर जंगली जानवर व हाथी भी पानी पीने आते हैं।

    मकान किया क्षतिग्रस्त, फसल भी रौंदी

    कटघोरा वनमंडल के एतमानगर रेंज के ग्राम पचरा के आश्रित मोहल्ला मानिकपुर में 38 हाथियों के झुंड ने बुधवार की रात जमकर कहर बरपाया। हाथियों ने गांव के किसान पन्नालाल मिश्रा के मकान का एक हिस्सा तोड़ दिया। इसके अलावा 15 किसानों की खेत को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

    हाथी जब उत्पात मचा रहे थे, उस वक्त ग्रामीण अपने घरों में बैठे हुए थे। धान कटाई का काम तेजी से क्षेत्र में चल रहा है, ऐसे में पकी फसल को नुकसान होते देखने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं था। पिछले 10 दिन से एतमानगर रेंज में 38 हाथियों का झुंड डेरा जमाए हुए है।

    दरअसल यहां एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया है, जिसकी वजह से हाथी इस रेंज को नहीं छोड़ रहे हैं। इसके अलावा 18 हाथियों का झुंड बाल्को रेंज के अजगरबहार क्षेत्र में तीन दिन से डेरा जमाए हुए थे।

    अब यह झुंड बासिनखार, गंगदेई, डुमरडीह होते हुए कोरबा रेंज के आमाडांड व ढेंगुरडीह पहुंच गया है। हाथियों के आमाडांड में पहुंचते ही वन विभाग का दल मौके पर पहुंच गया था और हाथियों को खदेड़ने का प्रयास शुरू कर दिया गया है।

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