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    खांसी, ग्लूकोस के रॉ मटेरियल समेत 4 दवाओं के सैंपल फेल

    Published: Sat, 20 May 2017 07:33 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 10:36 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    रायपुर। 26 महीनों से बंद पड़ी स्टेट ड्रग लैबोरेट्री में शुरू हुई दवाओं की जांच में 4 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इनमें कफ सिरप (खांसी की दवा), ग्लूकोस बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी शामिल हैं। ये दवाएं बनाने वाली हिमाचल, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है।

    एप्पल फील्ड, एबोट हेल्थ केयर देश की नामी दवा कंपनियां हैं। हालांकि इन कंपनियों ने अमानक पाई गई दवाओं को मार्केट से वापस बुलवा लिया है। इनके खिलाफ कोर्ट केस दायर करने की तैयारी है।

    गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 3 आंखफोड़वा कांड हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की आंखें खराब हुईं थी। बिलासपुर नसबंदी कांड में 16 महिलाओं की जान गई थी। इनमें इस्तेमाल दवाएं अमानक पाई गई थीं।

    ये पाईं गईं अमानक

    1 कोरटेस- कफ सिरप

    कंपनी- एप्पल फील्ड इंटरनेशनल, हिमाचल प्रदेश

    क्या मिला- 100 एमएल की शीशी में 98 एमएल दवा पाई गई।

    2. डेक्ट्रोस- ग्लूकोस ओरल, इंजेक्शन दोनों फॉर्म में

    कंपनी- राजाराम मेज प्रोडक्ट, राजनांदगांव, सीजी

    क्या मिला- प्रोडक्ट के लेबल में ड्रग में क्या-क्या है, इसकी संपूर्ण जानकारी नहीं थी। यह रॉ मटेरियल मिला।

    3. टोसेस- कफ सिरप

    कंपनी- एबोट हेल्थकेयर प्रोडक्ट, मुंबई, महाराष्ट्र

    क्या मिला- कोडिन फॉस्फेट 27 फीसदी कम पाया गया। यह एल्कोलाइड है, नशे के रुप में इस्तेमाल होता है।

    4. न दवा का नाम न एक्सपायरी डेट-

    कोरिया जिला ड्रग इंस्पेक्टर आलोक मिंज ने 8 मार्च 2017 को स्थानीय दवा दुकान से खांसी की दवा की सैंपलिंग की। दवा का नाम, बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट की कोई जानकारी नहीं थी। दवा स्टोर से तमाम शीशी को जब्त कर लिया गया। जांच में दवा मानक पर नहीं पाई गई। कफ सिरप में जो कंटेंट होने चाहिए, वह नहीं मिले। विक्रेता, थोक सप्लायर के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।

    26 महीने बाद शुरू हुई लैब-

    दिसंबर 2015 में तत्कालीन ड्रग एनालिस्ट के इस्तीफे के बाद पद खाली था। अक्टूबर 2016 में मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. जेके राजवैद्य की नियुक्ति हुई, लेकिन उन्हें नोटिफिकेशन 16 फरवरी 2017 को जारी हुई, जिसके बाद दवाओं की टेस्टिंग शुरू हुई। बीच के 26 महीने टेस्टिंग के अभाव में ड्रग इंस्पेक्टरों ने सैंपल नहीं लिए। 10 करोड़ के उपकरण वाली लैब में साइंटिस्ट के 8 पद खाली हैं।

    राज्य में 2 हजार करोड़ का कारोबार

    प्रदेश में दवा का सालाना कारोबार 2 हजार करोड़ रुपए का है। रायपुर दवा बाजार मध्य-भारत में सबसे बड़ा है। यहां से ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश दवाएं सप्लाई होती हैं। सूत्र बताते हैं कि ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्री में जांच न होने का फायदा दवा निर्माता कंपनियां उठाती रहीं।

    ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया को भेजी रिपोर्ट

    - 4 कंपनियों की दवा मानकों पर नहीं पाई गई हैं। नियमानुसार कोर्ट केस के लिए प्रक्रिया जारी है। ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया को रिपोर्ट भेजी है। साइंटिस्ट भर्ती प्रक्रिया जारी है। - पीवी नरसिम्हाराव, नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग

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