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    NGT ने अर्जी ठुकराई, दिल्ली-NCR में 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियां बैन

    Published: Thu, 14 Sep 2017 02:33 PM (IST) | Updated: Fri, 15 Sep 2017 09:09 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्र सरकार की दिल्ली - एनसीआर में 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों को चलाने पर लगी रोक हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में डीजल वाहन कैंसर जैसे रोगों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ऐसी याचिका पहले ही खारिज कर चुका है।

    वहीं, एनजीटी के ग्रीन पैनल ने याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 'सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने कोई पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की और वैसे ही ढोंग करने आ गया।'

    एनजीटी ने अप्रैल 2015 में 10 साल पुराने डीजल वाहन व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन के चलने पर रोक लगा दी थी। एनजीटी ने कहा था कि वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहन जिम्मेदार हैं। वहीं एनजीटी ने पिछले वर्ष दिल्ली के आरटीओ को निर्देश दिया था कि दिल्ली में चल रहे 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण रद किया जाए।

    मामले में सरकार का तर्क था कि इस समय ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत 10 साल से पुराने और बीएस 1 या बीएस 2 मानकों का पालन करने वाले डीजल वाहनों को सड़कों से हटाया जा सके। सरकार ने कहा था कि एनजीटी का आदेश मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। ये महज गलतफहमी है कि मात्र डीजल वाहनों से प्रदूषण होता है।

    कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं डीजल वाहन

    एनजीटी ने 10 वर्ष पुराने डीजल चालित वाहनों पर प्रतिबंध न हटाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि डीजल वाहनों से होने वाला प्रदूषण कैंसर रोगों के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। लोगों को इसके घातक परिणाम झेलने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक डीजल वाहन 24 पेट्रोल और 84 सीएनजी वाहनों के बराबर प्रदूषण फैलाता है।

    'अगर केंद्र सरकार इस आदेश को नहीं मानती तो हम मूकदर्शक बनकर लोगों को स्थिति से जूझते हुए नहीं देखेंगे। इस दिशा में सख्त कदम उठाएंगे। केंद्र और राज्य सरकार दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने में असफल ही साबित हुए हैं।' -जस्टिस स्वतंत्र कुमार, अध्यक्ष, एनजीटी

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