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    5 रोचक बातें: जब कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट हुई भारत की राजधानी

    Published: Fri, 12 Feb 2016 11:28 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Sep 2017 03:27 PM (IST)
    By: Editorial Team
    delhi capital of india 12 02 2016

    मल्टीमीडिया डेस्क। दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान 12 दिसंबर 1911 को हुआ था। तब भारत के शासक किंग जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरबार में इसकी आधारशीला रखी थी। बाद में ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर हरबर्ट बेकर और सर एडविन लुटियंस ने नए शहर की योजना बनाई थी। इस योजना को पूरा करने में दो दशक लग गए। इसके बाद 13 फरवरी 1931 को आधिकारिक रूप से दिल्ली देश की राजधानी बनी। एक नजर दिल्ली से जुड़ी पांच रोचक बातें पर -

    1. नामकरण की रोचक कहानियां -

    इतिहासकारों का मानना है दिल्ली शब्द फारसी के देहलीज से आया है क्योंकि दिल्ली गंगा के तराई इलाकों के लिए एक ‘देहलीज’ थी। कुछ लोगों का मानना है कि दिल्ली का नाम तोमर राजा ढिल्लू के नाम पर पड़ा। एक अभिशाप को झूठा सिद्ध करने के लिए राजा ढिल्लू ने इस शहर की बुनियाद में गड़ी एक कील को खुदवाने की कोशिश की। इस घटना के बाद उनके राजपाट का तो अंत हो गया लेकिन मशहूर हुई एक कहावत, 'किल्ली तो ढिल्ली भई, तोमर हुए मतीहीन', जिससे दिल्ली को उसका नाम मिला।

    2. यूं हुआ था राजधानी बनाने का ऐलान: दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान 12 दिसंबर 1911 को हुआ था। ब्रिटिश राज के सबसे बड़े तमाशे दिल्ली दरबार में पहली बार किंग जॉर्ज पंचम अपनी रानी क्वीन मैरी के साथ मौजूद थे। उन्होंने अस्सी हजार लोगों की मौजूदली में घोषणा की, हमें भारत की जनता को यह बताते हुए बेहद हर्ष होता है कि सरकार और उसके मंत्रियों की सलाह पर देश को बेहतर ढंग से प्रशासित करने के लिए ब्रिटिश सरकार भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करती है।

    अहम तारीखें जिन्होंने दिल्ली को बनाया 'राजधानी दिल्ली'

    3. बहुत पिछड़ी थी दिल्ली -

    तब दिल्ली बहुत पिछड़ी थी। बॉम्बे, कलकत्ता और मद्रास जैसे महानगर हर बात में काफी आगे थे। यहां तक कि लखनऊ और हैदराबाद भी दिल्ली से बेहतर माने जाते थे। दिल्ली की महज तीन फीसदी आबादी अंग्रेजी पढ़ पाती थी। यही कारण है कि विदेशी भी बहुत कम आते थे। मेरठ (2161 विदेशी) की तुलना में दिल्ली में महज 992 विदेशी ही आते थे। हालात इतने खराब थे कि कोई बड़ा आदमी वहां पैसा लगाने को तैयार नहीं था, लेकिन भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में होने के कारण दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान हुआ। दो दशक तक इसे विकसित किया गया।

    4. पेट्रोल 30 पैसे लीटर, तेज गति से वाहन चलाने का फाइन 100 रुपए -

    तब दिल्ली में पेट्रोल तीस पैसे लीटर था। लेकिन वाहन तेजी से चलाने पर सौ रुपए तक अर्थदंड वसूला जाता था। यह तेज गति थी 19 किमी प्रति घंटा। दिल्ली में बर्मा ऑइल कंपनी पेट्रोल बांटती थी।

    5. घड़ी देखकर होते थे फोन कॉल्स -

    किंग जॉर्ज पंचम के उस दौरे के बाद से पोस्ट ऑफिस से फोन कॉल करने की सुविधा मिली थी। हालांकि चुनिंदा रईस लोग ही फोन लगाते थे, लेकिन खास बात यह थी कि तब फोन कॉल्स घड़ी देखकर होते थे। बातचीत का तीसरा मिनट शुरू होने का मतलब था कि अगले 60 सेकंड में बात खत्म करके कॉल कट करना होगा। तीन मिनट के कॉल के चार आने यानी 25 लगते थे।

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