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    पति को शराबी प्रचारित करना तलाक का आधार : हाई कोर्ट

    Published: Thu, 13 Oct 2016 11:06 PM (IST) | Updated: Thu, 13 Oct 2016 11:12 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। पति को शराबी के रूप में प्रचारित करना समाज में उसकी प्रतिष्ठा नष्ट करने के समान है। विशेषकर शिक्षक पर यह आरोप अत्यंत क्रूरता की श्रेणी में आता है। यह तलाक का आधार है। यह टिप्पणी करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने एक महिला की याचिका खारिज कर दी।

    महिला ने पति को क्रूरता के आधार पर निचली अदालत द्वारा तलाक प्रदान करने के फैसले को चुनौती दी थी।

    अदालत ने कहा कि इस मामले में पत्नी ने झूठे आरोप लगाए हैं। महिला का व्यवहार ठीक नहीं था।

    वह ससुराल पक्ष का ही नहीं घर में आने वाले मेहमानों का भी अपमान करती थी। वह तांत्रिक क्रिया में लिप्त रहती थी। यह सब मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि महिला ने पति पर किसी शिक्षिका से अवैध संबंध होने का आरोप लगाया था, लेकिन वह उसका कोई साक्ष्य पेश नहीं कर पाई।

    अदालत ने कहा कि दोनों का साथ रहना असंभव है। दंपती के बीच फिर से सामान्य वैवाहिक जीवन जीने की उम्मीद करना व्यर्थ है। ऐसे में वे तलाक मंजूर संबंधी फैसले को उचित मानते हुए महिला की याचिका को खारिज करते हैं।

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