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    बीवी का तलाक व दूसरी शादी की बात करना क्रूरताः दिल्ली हाईकोर्ट

    Published: Mon, 22 Feb 2016 04:00 PM (IST) | Updated: Mon, 22 Feb 2016 04:02 PM (IST)
    By: Editorial Team
    delhi hc wife fake letter 22 02 2016

    नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते 28 साल से अपनी बीवी से अलग रह रहे एक शख्स को यह कहते हुए तलाक की अनुमति दे दी कि अकेला एक पत्र भी क्रूरता का व्यवहार किए जाने का आधार हो सकता है। अदालत का मानना था कि इस एक पत्र से पति को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।

    दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नाजमी वजीरी ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि एक पति के लिए अपनी बीवी से दूर रहना काफी कष्टकारी है। इतना ही नहीं, जब उसकी बीवी उसे चिट्ठी लिखकर इत्तला करे कि वह वैवाहिक संबंध खत्म करना चाहती है और एक अन्य शख्स से शादी करना चाहती है।

    इस दंपति की शादी 1980 में हुई थी और 1987 में पति अपनी बीवी और चार साल की बच्ची को भारत छोड़कर अमेरिका चला गया था। 1990 में बीवी ने पति को चिट्ठी लिखा कि उन्हें तलाक ले लेना चाहिए। चिट्ठी में उसने यह भी लिखा कि एक अन्य शख्स है जिससे वह शादी करना चाहती है और वह उसकी बच्ची को भी अपनाने के लिए तैयार है।

    अंततः 1995 में यह मामला निचली अदालत में पहुंचा। वहां बीवी ने अपने बयान में कहा कि उसने पति को झूठी चिट्ठी लिखी थी। वह केवल आत्मसंतोष के लिए उसे झटका देना चाहती थी क्योंकि वह उसके साथ रहने के लिए आतुर थी। इस पर अदालत ने कहा कि यह क्रूरता भरा व्यवहार है और उसने महिला का बात नहीं मानी।

    निचली अदालत के फैसले को बाद में दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट में भी महिला ने बयान दिया कि उसका कोई पुरुष मित्र नहीं है और न उसकी दोबारा शादी करने की कोई योजना थी। हालांकि, अदालत उसके इन दलीलों से सहमत नहीं हुई।

    हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि बीवी की झूठी चिट्ठी से उसके पति को मानसिक आघात पहुंचा और वह तनाव में आया है, उसकी दलीलों को खारिज कर दिया।

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