Naidunia
    Tuesday, August 22, 2017
    Previous

    फैसले से पीड़ितों की टूटी हिम्मत, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

    Published: Thu, 16 Feb 2017 11:06 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 10:51 AM (IST)
    By: Editorial Team
    fb blbllllllllll 16 02 2017

    नई दिल्ली। सीरियल बम ब्लास्ट में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिजनों का दर्द कोर्ट के फैसले के बाद छलक पड़ा। वर्षों बाद भी उस मंजर को याद कर सिहर जाने वाले पीड़ितों की हिम्मत टूट चुकी है, लेकिन अब भी अपनों को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। वे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

    सरोजनी नगर मिनी मार्केट के अध्यक्ष व साउथ एशियन फोरम पीपल अगेंस्ट टेरर के अध्यक्ष अशोक रंधावा ने कहा कि कोर्ट के फैसले की मैं आलोचना नहीं कर रहा हूं, लेकिन 11 साल बाद आरोपियों के बरी होने से आतंकियों के हौसले बढ़ेंगे। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

    बम ब्लास्ट में बेटे माइकल, बहू बबली व पोते एल्विन को खो चुकीं शालिनी दास कहती हैं कि हमें तो कोर्ट ने ही सजा दी है। कोर्ट से फैसले से दुखी हूं।

    उम्मीद थी कि आरोपियों को फांसी होगी। मेरी हिम्मत टूट चुकी है, लेकिन अपने बच्चों को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी।

    ब्लास्ट में घायल हुए डीटीसी बस ड्राइवर कुलदीप सिंह कहते हैं कि सभी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। कोर्ट के फैसले से आतंकियों के हौसले बढ़ेंगे।

    विनोद पोद्दार कहते हैं कि ब्लास्ट में मैंने बेटे को खो दिया था और बेटी गंभीर रूप से घायल हुई थी। उनका हाथ व पैर कट गया। एक फैसला आने में 11 साल लग गए, अब इस फैसले को आगे चुनौती देंगे तो वहां भी दस साल लगेंगे, कुछ भी हासिल होने की उम्मीद नहीं है।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें