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    दिल्ली ब्लास्ट: 67 मौतों का एक जिम्मेदार, वो भी बाहर

    Published: Thu, 16 Feb 2017 11:36 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 10:51 AM (IST)
    By: Editorial Team
    delhi blast 16 02 2017

    नई दिल्ली । 2005 में धनतेरस के दिन राजधानी के सरोजनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के 11 साल बाद पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को एक दोषी को 10 साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपियों को बरी कर दिया।

    न्यायाधीश रितेश सिह ने 140 पेज के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष सभी आरोपियों पर दोष साबित करने में नाकाम रहा। तारिक अहमद डार आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ था। गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) की धारा 38 व 39 में उसे दोषी करार दिया गया है।

    इसके तहत अधिकतम सजा 10 साल कैद और जुर्माने का प्रावधान है और वह इतनी अवधि पहले ही जेल में काट चुका है। उसे अब इस मामले में छोड़ा जा सकता है। अभियोजन पक्ष की मानें तो तारिक ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ सीरियल बम ब्लास्ट की साजिश रची थी।

    तारिक पर मनी लांड्रिग का एक अन्य मामला लंबित है, जिसके चलते उसे अभी जेल में ही रहना पड़ेगा। वहीं मोहम्मद हुसैन फजली व मोहम्मद रफीक शाह कागजी कार्यवाही पूरी होते ही तिहाड़ जेल से बाहर आ जाएंगे।

    इससे पूर्व मामले में फारुख अहमद बटलू व गुलाम अहमद खान को राजधानी में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए फंड जुटाने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। इसमें सजा की अधिकतम अवधि जेल में काटने के चलते दोनों को छोड़ दिया गया था।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, तारिक ने अबू उजेफा, अबू अल कामा, राशिद, शाजिद अली व जाहिद के साथ मिलकर भारत के खिलाफ युद्ध करने, दिल्ली में सीरियल बम ब्लास्ट करने की साजिश रची थी। तारिक को छोड़कर अन्य आरोपियों को दिल्ली पुलिस पकड़ नहीं पाई। पुलिस को आशंका है कि ये सभी गुलाम कश्मीर में छिपे हैं।

    कहां-कहां हुए थे धमाके

    29 अक्टूबर 2005 को धनतेरस के दिन आतंकियों ने दिल्ली में तीन बम धमाके किए थे। दो धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज जैसे मुख्य बाजारों में हुए, जबकि तीसरा धमाका गोविदपुरी में एक बस में हुआ था। इनमें 67 लोगों की मौत हो गई थी और 220 घायल हो गए थे।

    फैसले की कापी देखकर उठाएंगे अगला कदम: दिल्ली पुलिस

    सरोजनी नगर ब्लास्ट के मामले में अदालत के फैसले पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामले में आरोपियों का दोष साबित करना काफी मुश्किल होता है। एक अधिकारी ने बताया कि अभी उन्होंने पूरा फैसला नहीं देखा है। जब उसे देखेंगे तब तय करेंगे कि इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की जाए या नहीं। निर्णय की कापी देखे बगैर कुछ कहना काफी मुश्किल है।

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