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    संपादकीय : पाकिस्‍तान में चरमपंथ की बर्बरता

    Published: Fri, 17 Feb 2017 08:29 PM (IST) | Updated: Sat, 18 Feb 2017 12:30 AM (IST)
    By: Editorial Team
    pakistan wong 17 02 2017

    पाकिस्तान 'इस्लामी गणराज्य है। वहां बहुसंख्यक आबादी मुस्लिम है। इस लिहाज से इस्लाम के नाम पर सक्रिय संगठनों के लिए यह प्रिय स्थान होना चाहिए। लेकिन साफ है कि इस्लामी चरमपंथी संगठनों के तांडव से पाकिस्तान भी नहीं बच पाता। ताजा घटना गुरुवार को सिंध प्रांत के सहवान में हुई। वहां मशहूर लाल शाहबाज कलंदर दरगाह के भीतर आत्मघाती हमले में करीब 100 लोग मारे गए। 250 से ज्यादा घायल हुए। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने हमले की जिम्मेदारी ली। आईएस कुछ साल पहले सीरिया व इराक में बना। लेकिन उसने खुद को दुनियाभर के मुसलमानों का 'खिलाफत (यानी राज्य) घोषित किया। तब से अपने ब्रांड के इस्लाम को फैलाने के लिए दुनिया के अनेक हिस्सों में वह बर्बर हमले करता रहा है। पश्चिम के कई विकसित देश उसके निशाने पर आ चुके हैं। परंतु पाकिस्तान में इतना घातक हमला उसने पहली बार किया है।

    करीब एक साल पहले एक अमेरिकी रिपोर्ट में उल्लेख हुआ था कि ये खतरनाक संगठन पाकिस्तान में पैठ बना रहा है। भारत के कई नौजवान भी उसके असर में आकर गुमराह हुए। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गुटों से जुड़े लोग कई मौकों पर आईएस के झंडे लहराते देखे गए हैं। मगर ये संगठन इस पैमाने पर खूनखराबा करने की हैसियत में पहुंच चुका है, इसका अंदाजा पहले नहीं था।

    ध्यानार्थ है कि उसने सूफी संत लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह को निशाना बनाया। माना जाता है कि महान सूफी कवि अमीर खुसरो ने शाहबाज कलंदर के सम्मान में 'दमादम मस्त कलंदर गीत लिखा था। सदियों से ऐसे गीत और सूफी परंपरा दक्षिण एशिया की खास विरासत रहे हैं। इस रवायत में मजहब के रूहानी पहलू पर जोर दिया गया। भारतीय उपमहाद्वीप की साझा संस्कृति के विकास में इस परंपरा का विशिष्ट योगदान रहा। इस संस्कृति से जुड़े प्रतीक स्थलों को महजबी चरमपंथी निशाना बनाते हैं। ऐसा वे दशकों से कर रहे हैं। आईएस ने भी इस इलाके में अपना पहला हमला ऐसे एक स्थल पर किया, तो उसमें हैरत की बात नहीं है। मगर यह मजहबी आधार पर समाज को बांटने वाले लोगों के लिए एक सबक है। जिस विचारधारा ने दो-राष्ट्रों के सिद्धांत की वकालत कर पाकिस्तान को अलग देश बनवाया, उसे मानने वाले लोगों को क्या इस पर आत्ममंथन नहीं करना चाहिए कि एक इस्लामी देश में मुस्लिम पहचान वाली एक जगह को इस्लामी चरमपंथी क्यों निशाना बनाते हैं?

    दरअसल, कट्टरपंथ की यही निशानी है। हर कट्टरपंथी संगठन दूसरों को खुद से कम विशुद्ध ठहराने की होड़ में ऐसे वीभत्स कृत्यों को अंजाम देता है। बहरहाल, भारत के लिए सबक यह है कि अपनी सुरक्षा के लिए उसे कमर और कसनी होगी। आईएस जैसा घातक गुट हमारे करीब पहुंच गया है। इसे हल्के से लेने का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।

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