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    संपादकीय : आम हित में जीएसटी

    Published: Fri, 19 May 2017 08:05 PM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 04:01 AM (IST)
    By: Editorial Team
    gst1562 19 05 2017

    किसी नई चीज की तरह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर भी देशभर के अलग-अलग हल्कों में कई प्रकार की आशंकाएं आरंभ में मौजूद थीं। लेकिन जैसे-जैसे इसकी तस्वीर साफ हुई है, न सिर्फ अंदेशों का निवारण हुआ है, बल्कि इस नई परोक्ष कर व्यवस्था से आम जिंदगी के सुगम होने की आशा भी बलवती हुई है। केंद्र और राज्य सरकारों की इसके लिए तारीफ होनी चाहिए कि उन्होंने सारे देश के लिए समान परोक्ष कर प्रणाली की रूपरेखा तैयार करते समय आम इंसान के हितों को सर्वोपरि रखा। श्रीनगर में शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल ने सेवाओं के लिए कर दरों को तय किया, तो यह सुखद खबर आई कि शिक्षा और स्वास्थ्य को पूरी तरह करमुक्त रखने का निर्णय हुआ है। परिवहन पर महज 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दो महत्वपूर्ण बातें कहीं। एक यह कि अधिक कुशल कर व्यवस्था होने के साथ-साथ जीएसटी उपभोक्ता हित में भी होगी। उन्होंने ध्यान दिलाया कि शायद कोई ऐसी वस्तु या सेवा है, जो नई कर प्रणाली लागू होने से महंगी होगी। यानी टैक्स या तो पुरानी दर से ही लगेगा, या फिर घटेगा।


    प्रस्तावित जीएसटी में कर की चार दरें रखी गई है। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली जरूरी वस्तुओं पर सिर्फ 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। जीएसटी के तहत यह न्यूनतम दर है। ज्यादातर सामानों पर 5 से लेकर 18 फीसदी तक टैक्स लगेगा। अधिकतम दर 28 फीसदी है, जो सिर्फ उन 19 प्रतिशत चीजों पर लगेगी, जिनका उपभोग संपन्न् लोग करते हैं। ध्यानार्थ है कि अनाज, ताजा मांस, मछली, चिकन, अंडा, दूध, मक्खन, दही, शहद, नमक, फल एवं सब्जियों को करमुक्त रखा गया है।


    इस तथ्य ने भी ध्यान खींचा है कि जीएसटी दरों को तय करने के लिए जीएसटी काउंसिल की बैठक जम्मू-कश्मीर में आयोजित की गई। बेशक इसका प्रतीकात्मक महत्व है। जिस कर प्रणाली के जरिए सारे भारत को एकरूप बाजार बनाने का उद्देश्य है, उससे देश का कोई हिस्सा अलग नहीं रह सकता। जीएसटी काउंसिल की बैठक में जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने एलान किया कि उनका राज्य अपना जीएसटी बिल लाएगा। गौरतलब है कि जहां देश के बाकी राज्यों को टैक्स वसूलने का हक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 से प्राप्त है, वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार वहां के संविधान की धारा पांच के तहत कर उगाहती है। ताजा बैठक का हासिल यह है कि जम्मू-कश्मीर भी जीएसटी का हिस्सा बनने को तैयार हो गया है। तो अब कहा जा सकता है कि जीएसटी के जरिए भारतीय बाजार को आंतरिक बाधाओं से मुक्त करने, आर्थिक विकास दर को गति देने और आमजन के रोजमर्रा के लेन-देन को आसान बनाने की जो उम्मीदें जोड़ी गई थीं, वो अब सचमुच जमीन पर उतर रही हैं। इससे यह भरोसा भी बंधा है कि अमल संबंधी रही-सही आशंकाएं भी जीएसटी लागू होने के बाद जल्द ही दूर जाएंगी।

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