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    संपादकीय : सॉफ्ट डिप्लोमेसी का कमाल

    Published: Tue, 10 Oct 2017 10:27 PM (IST) | Updated: Wed, 11 Oct 2017 04:03 AM (IST)
    By: Editorial Team
    nirmala-sitharamanhello 10 10 2017

    रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन से चीन प्रभावित हुआ। वहां के सरकारी मीडिया में उनकी तारीफ के पुल बांधे गए। इस बात ने सबका ध्यान खींचा है। इसलिए कि जून में जब डोकलाम गतिरोध शुरू हुआ, उसके बाद से चीनी मीडिया का भारत और भारतीय नेताओं के प्रति रुख आक्रामक रहा है। अगस्त के आखिर में डोकलाम विवाद हल हुआ। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिक्स शिखर बैठक में भाग लेने चीन गए। वहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सद्भावपूर्ण मुलाकात हुई। इसके बावजूद चीनी मीडिया का नजरिया नहीं बदला। मगर निर्मला सीतारमन की 'सॉफ्ट डिप्लोमेसीको वह दरकिनार नहीं कर पाया है। भारत की पहली महिला रक्षा मंत्री सीतारमन सिक्किम में नाथू-ला अग्रिम चौकी पर गईं। वहां सीमा के उस पार तैनात चीनी सैनिकों को उन्होंने 'नमस्ते कहा। इसका जवाब उन फौजियों ने 'नी हाउ(अभिवादन के लिए चीनी शब्द) कहकर दिया। दोनों तरफ से सद्भाव दिखाया गया। इससे चेहरों पर मुस्कराहट आई। इसका वीडियो चीन के सरकारी टीवी चैनल सीजीटीएन पर दिखाया गया। तस्वीरें चीनी अखबारों में छपीं। उग्र रुख रखने वाले अंग्रेजी अखबार 'ग्लोबल टाइम्सने इस बारे में दक्षिण एशियाई मामलों के एक चीनी विशेषज्ञ की टिप्पणी भी छापी। उसमें कहा गया कि भारतीय रक्षा मंत्री ने अभिवादन के जरिए सद्भावना का संदेश भेजा। यह द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और रिश्तों के फिर से सामान्य होने का संकेत है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा- 'भारतीय रक्षा मंत्री का चीनी सैनिकों को नमस्ते कहना यही दिखाता है कि वे सीमा पर शांति बनाए रखने के पक्ष में हैं और भविष्य में किसी तरह का विवाद नहीं चाहतीं।


    स्पष्टत: सीतारमन ने एक यात्रा और एक सांकेतिक संदेश से वो हासिल कर लिया, जो आम तौर पर कई वार्ताओं से प्राप्त नहीं होता। सीतारमन की योग्यता असंदिग्ध है। रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में पिछले फेरबदल के समय ही मिली। उनके इस भूमिका में आए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। लेकिन इसी दरम्यान उन्होंने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दिखा दी है। पिछले दिनों अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस भारत आए। उन्होंने भारत से अफगानिस्तान की सुरक्षा में अधिक बड़ी भूमिका निभाने का आग्रह सामने रखा। लेकिन सीतारमन ने अफगानिस्तान में भारतीय फौज भेजने से दृढ़ता से इनकार कर दिया। जाहिर है, उनकी प्रतिक्रिया समय एवं स्थिति के तकाजे के मुताबिक होती है। इसीलिए इस छोटी अवधि में उन्होंने अपेक्षा जगा दी है कि वे खुद को भारत के सर्वश्रेष्ठ रक्षा मंत्रियों में से एक साबित करेंगी। इस सिलसिले में नरेंद्र मोदी सरकार की इस विशिष्टता पर सहज ही ध्यान जाता है कि इसमें विदेश और रक्षा जैसे दो बेहद अहम मंत्रालयों का प्रभार महिलाओं के पास है। और अब यह जगजाहिर तथ्य है कि सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमन इन बड़े दायित्वों को बखूबी निभा रही हैं। इस रूप में दोनों ने महिलाओं की योग्यता और कार्यक्षमता को लेकर समाज में मौजूद कई पूर्वाग्रहों को ध्वस्त कर दिया है। इससे लोगों में भरोसा मजबूत हुआ है कि देश सुरक्षित हाथों में है।

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