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    संपादकीय : दोस्ती का नया मुकाम

    Published: Mon, 13 Nov 2017 10:38 PM (IST) | Updated: Tue, 14 Nov 2017 04:01 AM (IST)
    By: Editorial Team
    modi-trump 13 11 2017

    नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए गर्मजोशीपूर्ण माहौल डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले शुक्रवार को ही बना दिया था, जब एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) की बैठक में उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री की मुक्त-कंठ से प्रशंसा की थी। ट्रंप ने कहा कि मोदी भारत के लोगों को एक साथ लाने में बेहद कामयाब रहे हैं। उन्होंने अद्भुत विकास हासिल करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की तारीफ में भी कोई कोताही नहीं बरती। सोमवार को फिलीपींस की राजधानी मनीला में मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से द्विपक्षीय वार्ता के बाद ट्रंप की उसी सद्भावना को याद किया और कहा - 'हाल में ट्रंप जहां भी गए हैं और जब भी उन्हें भारत के बारे में बोलने का मौका मिला है, उन्होंने आशा भरी और उच्च सम्मान दर्शाने वाली बातें कही हैं। इसके आगे मोदी यह भी बोले - 'अमेरिका तथा विश्व को भारत से जो अपेक्षाएं हैं, मैं आश्वासन देता हूं कि उन्हें पूरा करने का भारत भरसक प्रयास करेगा।


    ट्रंप की इस भावना और मोदी के इरादे की झलक रविवार को भी मनीला में देखने को मिली, जब अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत चतुष्कोणीय बैठक में शामिल हुआ। अमेरिका लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऐसा समीकरण चाहता था। लेकिन पूर्व सरकारों के दौर में भारत ऐसी किसी पहल का हिस्सा बनने से हिचकता था, जिसे चीन के खिलाफ समझा जाए। मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद इस नीति में व्यापक बदलाव लाई। वह खुलेआम भारत को अमेरिकी धुरी के करीब ले गई। उसी का तार्किक परिणाम मनीला में हुई बैठक है। इसमें दक्षिण चीन सागर में मुक्त नौवहन के सभी देशों के अधिकार को जताया गया। चीन ने उसका मतलब जरूर समझा होगा। इन चारों देशों ने दो-टूक कहा कि स्वतंत्र, खुले, खुशहाल और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र से विश्व के दीर्घकालिक हित जुड़े हैं। इस इलाके में चीन के बढ़ते दखल के मद्देनजर यह बात बेहद अहम है। फिर चीन अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना 'वन वेल्ट वन रोड के जरिए पूरी दुनिया में अपना दबदबा बढ़ाने में जुटा है। अब दुनिया की चार बड़ी शक्तियों ने एकजुट होकर संदेश भेजा है कि चीन की मनमानियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपनी पूर्वी एशिया यात्रा के दौरान ट्रंप ने ऐसे कई बयान दिए, जिनका भी यही अर्थ है।


    मनीला में भी भारत के प्रति ट्रंप प्रशासन का खास सद्भाव जाहिर हुआ। बेशक इस तमाम घटनाक्रम को मोदी सरकार की विदेश नीति की बड़ी सफलता माना जाएगा। मनीला में प्रधानमंत्री का संवाद दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संघ (आसियान) से हुआ। वहां उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति और यहां निहित संभावनाओं का विवरण दिया। इनमें से कई नेता वियतनाम में ट्रंप की जुबान से भारत की तारीफ सुन चुके थे। जब दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति भारत की चमकती संभावनाओं से मोहित है, तो आसियान नेताओं के लिए भारत और मोदी के महत्व को समझना अधिक आसान हो गया होगा। दुनिया में भारत की इस बढ़ती हैसियत का श्रेय एनडीए सरकार की कूटनीति को है। इसी का परिणाम प्रधानमंत्री की एक और सफल विदेश यात्रा है।

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