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    संपादकीय : मणिपुर में नई उम्मीद

    Published: Mon, 20 Mar 2017 10:11 PM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 04:01 AM (IST)
    By: Editorial Team
    n biren singh1 20 03 2017

    मणिपुर के नए मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने सोमवार को विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया। लेकिन इसके पहले ही उन्होंने अपने राज्य के वासियों को ऐसी खबर दी, जिससे उन्हें गहरी राहत मिली। राज्य की नगा संगठनों द्वारा 139 दिन से जारी नाकेबंदी समाप्त हो गई है। गुजरे वर्षों में नगा समुदाय और राज्य की बाकी आबादी के बीच अविश्वास की खाई लगातार चौड़ी हुई। इसी का ताजा नतीजा पिछले एक नवंबर को शुरू हुई नाकेबंदी थी। इसके कारण राज्य के लोगों को बेहद मुसीबतों का सामना करना पड़ा। रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल एवं अन्य कई आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो गई, फलस्वरूप इनके दाम आसमान छूने लगे। रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें इतनी महंगी हो गईं, जिसके बारे में शेष भारत में सोचना भी कठिन है।


    लेकिन अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने का वहां के लोगों को तुरंत लाभ मिला है। नाकेबंदी खत्म कराने में केंद्र सरकार ने भी अहम भूमिका निभाई। इसे केंद्र और राज्य में एक ही दल के सत्ता में होने का फायदा भी कहा जा सकता है। फिर भाजपा के नगालैंड की अधिकांश पार्टियों के साथ दोस्ताना रिश्ते हैं। इसका असर भी हुआ। हालिया विधानसभा चुनाव में नगा समुदाय के दल नगा पीपुल्स फ्रंट को चार सीटें मिलीं, जो अब बिरेन सिंह मंत्रिमंडल को समर्थन दे रहा है।


    तो कहा जा सकता है कि इन नए सियासी हालात से नाकेबंदी खत्म कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ। नाकेबंदी यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने लगाई थी। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग 2 और 37 को जाम कर दिया गया। ताजा समझौते के अनुसार यूएनसी के तमाम गिरफ्तार नेता बिना शर्त रिहा किए जाएंगे। नगा कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे। यूएनसी ने नाकेबंदी मणिपुर के नगा बहुल इलाकों में सात नए जिले बनाने के विरोध में लगाई थी। नए जिले बनाने का फैसला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने लिया था। नगा संगठनों ने माना कि ऐसा कर मणिपुर सरकार राज्य के नगा बहुल क्षेत्रों पर अपना स्थायी दावा जता रही है। यूएनसी उन इलाकों को बृहत्तर नगालैंड का हिस्सा मानती है। वह इन क्षेत्रों के नगालैंड में शामिल किए जाने की पक्षधर है।


    बहरहाल, गौरतलब है कि इस मूल विवाद के बारे में नए समझौते में कुछ नहीं कहा गया है। मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने भी कहा कि यह मणिपुर के विकास का आगाज भर है। यानी आगे और बेहतर खबरें राज्य के लोगों को मिलेंगी। बेशक इससे मणिपुर में उम्मीद का मौहाल बनेगा। फिर भी यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि अन्य मणिपुरवासियों तथा नगा समुदाय के बीच खाई चौड़ी है। मणिपुर के विभाजन की बात आते ही वहां हिंसक माहौल बन जाता है। उधर नगा संगठन उन इलाकों पर दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। आशा की जानी चाहिए कि बिरेन सिंह सरकार आगे चलकर इस मसले का स्थायी हल निकालेगी। फिलहाल उसने आशाजनक शुरुआत की है।

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