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    संपादकीय : ईवीएम से जुड़े संदेह का सटीक निवारण

    Published: Thu, 20 Apr 2017 10:52 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 04:00 AM (IST)
    By: Editorial Team
    vvpat 20 04 2017

    केंद्र ने सटीक निर्णय लिया। इससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर उठाए गए तमाम संदेह निराधार हो जाएंगे। हालांकि विपक्षी दलों ने ईवीएम में हेरफेर का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन जोरदार प्रचार अभियान चलाकर इन मशीनों की विश्वसनीयता को बड़ा मुद्दा बना दिया। इस क्रम में सत्ताधारी भाजपा के लिए इस प्रश्न का जवाब देना कठिन हो रहा था कि केंद्र वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) सिस्टम लगाने के लिए धन क्यों नहीं दे रहा है? ईवीएम में वीवीपैट लगे, यह निर्देश अक्टूबर 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने दिया था। वो आदेश सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर आया, जो अब भाजपा के सांसद हैं। स्वामी 2010 में ये मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे। इस तथ्य का सहारा लेकर विपक्ष ने मौजूदा विवाद में भाजपा को उलझाने की कोशिश की। हाल में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उसकी विशाल जीत को संदिग्ध बताने के प्रयास हुए। ऐसे में जरूरी था कि सरकार अविलंब वीवीपैट के लिए पर्याप्त धन आवंटित करे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3,173 करोड़ रुपए मंजूर कर इस तकाजे को पूरा कर दिया है। इस धन से 16 लाख 15 हजार वीवीपैट वाली वोटिंग मशीनें खरीदी जाएंगी। निर्वाचन आयोग ने 2013 के बाद 20,300 ऐसी मशीनें खरीदी थीं। 2015 में 67,000 और वीवीपैट ईवीएम का ऑर्डर दिया। उसमें 33,500 मशीनों की सप्लाई उसे हो चुकी है।


    अब धन के ताजा आवंटन के बाद आयोग विपक्ष की यह मांग पूरी करने की स्थिति में होगा कि 2019 का लोकसभा चुनाव पूरी तरह वीवीपैट मशीनों से कराया जाए। हालांकि सामान्य स्थितियों में 16 लाख से ज्यादा ऐसी मशीनों के उत्पादन में 30 महीने लगते, लेकिन आयोग के विशेष अनुरोध पर इनकी निर्माता कंपनियां (बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) 18 महीनों में इनकी आपूर्ति करने पर राजी हुई हैं। चूंकि मशीनों की किश्तों में सप्लाई जल्द शुरू होगी, अत: निर्वाचन आयोग को भरोसा है कि इस साल आखिर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पूरा मतदान वीवीपैट मशीनों के जरिए कराया जाएगा। इस तरह इसी वर्ष भारत में चुनावों को अधिक पारदर्शी बनाने की शुरुआत हो जाएगी। या इसे ऐसे कहा जाए कि मतदान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक और स्तर जुड़ जाएगा। वीवीपैट ईवीएम से जुड़ा एक प्रिंटर जैसा उपकरण होता है। मतदान करते ही मतदाता के सामने मशीन पर उस चुनाव निशान का फोटो आता है, जिसे उसने वोट दिया हो। सात सेकंड बाद वीवीपैट से उस वोट की पर्ची नीचे लगे एक बक्से में गिर जाती है। विवाद होने पर इन पर्चियों को गिना जा सकता है। अब ये व्यवस्था लागू करने दिशा में ठोस एवं निर्णायक कदम बढ़ा दिया है, तो अपेक्षित है कि विपक्ष ईवीएम के खिलाफ अपनी मुहिम तुरंत रोक दे। उसे याद रखना चाहिए कि चुनावों को विवादित बनाना लोकतंत्र के हित में नहीं है।

    और जानें :  #EVM #VVPAT #ECI #central govt
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