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    संपादकीय : ट्रंप के रुख से बढ़ता तनाव

    Published: Tue, 18 Apr 2017 08:41 PM (IST) | Updated: Wed, 19 Apr 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team
    donald-trump 18 04 2017

    रूस अब यह संकेत देने में कोई कोताही नहीं बरत रहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उसके हनीमून का दौर खत्म हो चुका है। दरअसल, अब अमेरिका-रूस संबंधों का पुराना तनाव लौटता दिखता है। रूस के सरकारी टेलीविजन पर क्रेमलिन (रूस सरकार) के प्रवक्ता दिमित्री किसेलयोव ने ट्रंप को उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन से भी अधिक खतरनाक बता दिया। गौरतलब है कि सीरिया में हालिया अमेरिकी मिसाइल हमले से पूर्व तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप एक-दूसरे की तारीफ करते सुने जाते थे। अमेरिका में इसकी जांच चल रही है कि क्या पिछले राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने ट्रंप के हक में बेजा दखल दिया? मगर अब स्थिति बदल गई है। सीरिया में पुतिन का हाथ राष्ट्रपति बशर अल-असद की पीठ पर है। अमेरिका ने बिना उन्हें भरोसे में लिए वहां एकतरफा कार्रवाई की। इससे पुतिन नाराज हुए। इसी बीच अमेरिका ने अफगानिस्तान में महाबमगिराकर माहौल और गरमा दिया। उसके तुरंत बाद उसने उत्तर कोरिया पर हमले के संकेत दिए। तो अब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चेताया है कि ऐसा करना बेहद जोखिम भरा होगा। चीन ने भी अमेरिका से उत्तर कोरिया पर एकतरफा कार्रवाई से बाज आने को कहा है।


    स्पष्टत: अचानक बड़ी वैश्विक शक्तियों के बीच टकराव बढ़ने लगा है। युद्ध की बातें होने लगी हैं। कुछ हलकों से कहा गया है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के समय उत्पन्न् आशंकाएं अब सच होती दिख रही हैं। ट्रंप प्रशासन आम-सहमति बनाने में यकीन नहीं करता। ना ही वह अंतरराष्ट्रीय कार्रवाइयों को संयुक्त राष्ट्र के दायरे में रखने के लिए वचनबद्ध है। दरअसल, ट्रंप की नीतियां अनिश्चित हैं। आईएस, उत्तर कोरिया और चीन के प्रति तो उनका रुख आरंभ से सख्त है, लेकिन बराक ओबामा के शासनकाल में वे सीरियाई राष्ट्रपति के खिलाफ सीधी कार्रवाई का विरोध करते थे। जबकि अपने शासनकाल में उन्होंने पहला हमला सीरिया स्थित असद के ठिकानों पर ही किया। अत: रूसी प्रवक्ता का कथन निराधार नहीं है कि ट्रंप के बारे अनुमान लगाना किम जोंग-उन के बारे में अंदाजा लगाने से भी ज्यादा मुश्किल है। बहरहाल, उत्तर कोरिया पर प्रस्तावित कार्रवाई खतरनाक मोड़ ले सकती है। अनुमानत: उत्तर कोरिया के पास 10-16 परमाणु हथियार हैं। अमेरिकी हमले की स्थिति में वह इनका इस्तेमाल कर सकता है। उससे दक्षिण कोरिया में बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। अमेरिका के 28,500 सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं। उसके एफ-16 लड़ाकू विमान और जमीनी हमला करने वाले ए-10 जेट विमान भी वहां हैं। दक्षिण कोरिया पर अमेरिका का संरक्षण रहा है। अमेरिका के 50 हजार सैनिक जापान में भी तैनात हैं। इसके बावजूद परमाणु युद्ध की आशंकाए जाहिर की जाने लगी हैं। इसीलिए रूस और चीन अमेरिका को चेता रहे हैं कि वह बातचीत से हल निकालने के रास्ते पर लौटे। मगर क्या आशा की जा सकती है कि ट्रंप इस सलाह पर ध्यान देंगे?

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