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    संपादकीय : आतंकवाद पर अमेरिकी वार

    Published: Fri, 14 Apr 2017 07:51 PM (IST) | Updated: Sat, 15 Apr 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team
    bomb-blast 14 04 2017

    अमेरिका ने अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के ठिकाने पर अब तक का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम गिराया। जीबीयू-43 नामक इस बम आक्रमण की तुलना 1945 में जापानी शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमों से किए गए हमले से की जा रही है। स्पष्टत: ये बहुत बड़ा और साहसी कदम है। यह दिखाता है कि आईएस की दहशतगर्दी के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सब्र किस हद तक चुकने लगा है। आईएस का आतंक खत्म करने का वादा उन्होंने अपने चुनाव अभियान में किया था। राष्ट्रपति बनने के लगभग पौने तीन महीनों के बाद उन्होंने इस दिशा में एक निर्णायक फैसला लिया। हालांकि ये बम तकरीबन दो किमी के दायरे को ध्वस्त में सक्षम था, लेकिन इसकी गूंज सारी दुनिया तक पहुंची है। आरंभिक खबरों के मुताबिक इस हमले में तीन दर्जन से ज्यादा आईएस आतंकवादी मारे गए। लेकिन इससे संचारित होने वाले भय को दुनियाभर में फैले इस्लामिक आतंकवादी महसूस करेंगे।


    भारत के लिहाज से यह सकारात्मक घटनाक्रम है। आईएस की दहशत का साया भारत पर भी पड़ने लगा है। अफगानिस्तान या पाकिस्तान में इस गुट का अड्डा होना भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस इलाके से आतंकवादी गुटों का सफाया हो, तो स्वाभाविक है कि उससे भारत में संतोष का एहसास होगा। हालांकि यह जरूर है कि वैश्विक मामलों में एकतरफा कार्रवाइयां अपेक्षित नहीं होतीं। विश्व व्यवस्था सुपरिभाषित नियमों से चले और वैश्विक खतरों के खिलाफ बहुपक्षीय सहमति से कार्रवाई हो, यह वांछित होता है। किंतु यह भी सच है कि ऐसी रजामंदी बनाना अब तक संभव नहीं हुआ है। ये बात सीरिया के मामले में भी बुधवार रात जाहिर हुई। वहां रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की निंदा करने वाले प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने वीटो कर दिया। चीन मतदान से बाहर रहा। निहितार्थ यह कि ऐसे मामलों पर भी तमाम देश अपने-अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए रुख तय करते हैं। तो 'अमेरिका फर्स्टकी नीति पर चलने वाले ट्रंप प्रशासन ने अपने हितों को सबसे ऊपर रखते हुए पहले सीरिया और अब अफगानिस्तान में हमला किया है। आतंकवाद के मामले में ये उसका सही रुख है, हालांकि साथ ही उसे ऐसे प्रयास भी करने चाहिए जिससे दुनिया युद्ध या बड़ी शक्तियों के टकराव में ना उलझ जाए। अमेरिका के पास जैसे बम हैं, उतने ही ताकतवर विस्फोटक रूस के पास भी हैं। अमेरिका ने फिलहाल मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (एमओएबी) नामक बम गिराया है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल बम के नाम से भी जाना जाता है। रूस के पास 'एविएशन थर्मोबैरिक बम मौजूद हैं, जो 'फादर ऑफ ऑल बम (एफओएबी) के रूप में चर्चित हैं। दुनिया ऐसे हथियारों के जरिए जोर-आजमाइश में फंस गई, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। इसलिए आईएस जैसे खतरों के विरुद्ध सहमति और बहुपक्षीय कार्रवाई की प्रासंगिकता अब भी बनी हुई है।

    और जानें :  # US attack # GBU-43 # MOAB # IS
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