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    संपादकीय : भारत का वाजिब ऐतराज

    Published: Fri, 21 Apr 2017 08:13 PM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 04:03 AM (IST)
    By: Editorial Team
    nirmala sitharaman 21 04 2017

    स्पष्टत: अमेरिका में एच-1बी वीजा संबंधी नियम बदलने की पहल को भारत ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। ये स्वाभाविक भी है। कायदे बदले, तो भारतीय आईटी कर्मियों पर उसका बुरा असर होगा। तो अमेरिका यात्रा पर गए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ये मुद्दा अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के सामने उठाया। इधर भारतीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने सख्त लहजे में इस प्रश्न पर भारत की नाराजगी जताई। कहा कि एच-1बी वीजा को लेकर चल रही 'बहस को विस्तृत करने की जरूरत है। इसमें ये पहलू भी शामिल होना चाहिए कि अमेरिकी कंपनियां भारत में मुनाफा कमा रही हैं। मंगलवार को एच-1बी वीजा संबंधी नियमों की समीक्षा के आदेश पर दस्तखत करते समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तथ्य की पूरी उपेक्षा की। ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट की नीति पर चल रहे हैं। उनके इस रुख ने वैश्वीकरण की ओर बढ़ती दुनिया में नए हालात पैदा कर दिए हैं। फिलहाल विभिन्न् देशों में अपने बाजार के दरवाजे बंद करने का दौर आता दिखता है। इसी हफ्ते ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने अपने देश में 457-वीजा कार्यक्रम रद्द करने का एलान किया। ये वीजा उन कुशल विदेशी कर्मियों को दिया जाता था, जिन्हें कंपनियां ऑस्ट्रेलिया लाकर नौकरी पर रखना चाहती थीं। इसके तहत 95,000 कर्मी ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर भारतीय हैं। टर्नबुल ने भी ट्रंप की तर्ज पर 'ऑस्ट्रेलिया फर्स्ट की बात की है। इन दोनों देशों के फैसलों के बाद न्यूजीलैंड ने भी अपने वीजा नियमों को सख्त करने इरादा जताया है।


    यानी रुझान यह है कि कई विकसित देश विदेशी कर्मियों का अपने यहां आना कठिन बना रहे हैं। इसका भारत जैसे देशों पर बहुत बुरा असर होगा, जिनकी अर्थव्यवस्था में बाहर जाकर काम करने वाले प्रशिक्षित कर्मियों का अहम योगदान है। ऐसे में यह पहलू चर्चा में लाना जरूरी है कि भारत जैसे देशों ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर अपने बाजार विदेशी कंपनियों के लिए बंद किए, तो इसकी चुभन अंतर्मुखी नीतियां अपना रहे देशों को महसूस होगी। बेहतर है कि समय रहते इस प्रवृत्ति पर लगाम लग जाए। वरना, दरवाजों को बंद करने का सकल परिणाम वैश्वीकरण का ठहरना या इस परिघटना का पलट जाना होगा। जबकि अभी ज्यादा वक्त नहीं गुजरा, जब इस पर दुनियाभर में आम सहमति दिखती थी कि वैश्वीकरण में सबका हित है।


    दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुली अर्थव्यवस्था के पैरोकार रहे देश ही अब कारोबार और रोजगार के निर्बाध प्रसार में बाधक बन रहे हैं। क्या वीजा मामले पर भारत सरकार के सख्त रुख से अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया का रुख बदलेगा? फिलहाल, कहना कठिन है। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार का इस मुद्दे को प्राथमिकता के साथ उठाना काबिल-ए-तारीफ है। उसने उचित ही यह स्पष्ट किया है कि भारत अपने आईटी कर्मियों से अनुचित व्यवहार को कतई स्वीकार नहीं करेगा।

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