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    मशीन

    Published: Fri, 17 Mar 2017 12:41 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Mar 2017 03:11 PM (IST)
    By: Editorial Team
    machine17 2017317 124547 17 03 2017

    उम्‍मीद नहीं थी कभी अपनी फिल्‍मों से एक्‍टर को स्‍टार बना देने का कौशल रखने वाले निर्देशक बंधु अपनी कला में इतने भोथरे हो जाएंगे कि घर के सितारे की संभावना को पहली फिल्‍म से इस कदर धूमिल कर देंगे। ‘मशीन’ अब्‍बास-मस्‍तान की सबसे कमजोर फिल्‍म के रूप में याद की जाएगी,जिसमें एक लोकेशन के अलावा सब कुछ फिसड्डी रहा। इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है?

    अब्‍बास-मस्‍तान में से अब्‍बास के बेटे मुस्‍तफा की लांचिंग फिल्‍म है 'मशीन'। हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में लांचिंग फिल्‍म में किसी नए सितारे को पेश करते समय निर्देशक की कोशिश रहती है कि वह उसे मसाला फिल्‍मों के लिए जरूरी गुणों से संपन्‍न दिखाए। अब्‍बास-मस्‍तान ने भी कोशिश की। उन्‍होंने 1993 की अपनी फिल्‍म ‘बाजीगर’ की कहानी को तोड़ा-मरोड़ा और लगभग शाहरुख खान की तरह मुस्‍तफा को पेश किया। अफसोस,एक तो मुस्‍तफा न तो शाहरुख खान की तरह टैलेंटेड निकले और न उन्‍हें काजोल और शिल्‍पा शेट्टी सरीखी अभिनेत्रियों का साथ मिला। यों लगता है कि मुस्‍तफा को हुनरमंद दिखाने के लिए सहयोगी और सहायक भूमिकाओं में उन्‍होंने और भी कमजोर एक्‍टर चुने। इससे फिल्‍म लचर होने के कारण देखने लायक भी नहीं रह गई।

    ‘बाजीगर’ के दिलीप ताहिल और जानी लीवर इस फिल्‍म में थोड़ी भिन्‍न भूमिकाओं में हैं। उन्‍हें और ज्‍यादा लाउड अंदाज में पेश किया गया है। अब्‍बास-मस्‍तान अपनी शैली के अनुरुप चुस्‍ती और गति बनाए रखते हैं,लेकिन इस बार दोनों गुण फिल्‍म से विरक्‍त करने में मदद करते हैं। दृश्‍य कमजोर हैं और अभिनेताओं का प्रदर्शन और भी कमजोर है। रोमांटिक और नाटकीय संवादों में हंसी छूटती है।

    - अजय ब्रह्मात्‍मज

    अवधि: 139 मिनट

    - रेटिंग - आधा स्टार

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