Naidunia
    Saturday, September 23, 2017
    PreviousNext

    'स्टार' टीवी ने जब घुटने टेक दिए थे हिंदी के आगे

    Published: Wed, 13 Sep 2017 09:56 AM (IST) | Updated: Sat, 16 Sep 2017 10:47 AM (IST)
    By: Editorial Team
    star-plus-1995 new 13 09 2017

    सुदीप मिश्रा। 2016 के अंत तक हमारे देश में लगभग 900 चैनल या तो अपनी जगह बना चुके हैं या पहुंच बनाने में लगे हैं। ज्यादा वक्त नहीं हुआ ये फैलावा हुए। बस नब्बे के दशक से इसकी शुरुआत हुई थी। इससे पहले लगभग तीन दशक तक यह देश मनोरंजन के नाम पर सिर्फ एक सरकारी चैनल देखा करता था। 'दूरदर्शन' इस बात का पूरा ध्यान रखता था कि देखने वालों को हिंदी में ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम उपलब्ध हों।

    भारत के एकमात्र हिंदी चैनल 'दूरदर्शन' से टकराने की शुरुआत 'स्टार' ने 1990 में ही कर दी थी। दशक शुरू हो रहा था और स्टार ने जीटीवी का दामन थामते हुए अपने प्लेटफॉर्म पर 'दूरदर्शन' से टकराने की तैयारी कर ली। तब स्टार का 'जीटीवी' दिन में दो-चार घंटे के प्रसारण से शुरू हुआ था। यह एक तरह का लालच था जो स्टार के पैकेज में शामिल किया गया था। यह लालच हिंदी दर्शकों को जोड़ने के लिए था।

    दरअसल, स्टार ने हिंदी की ताकत को बेहद कम आंका। इस समूह का इरादा यह था कि दो-चार घंटे का एक चैनल हिंदी का दिखाकर अपने खुद के तीन अंग्रेजी चैनल टिका दिए जाएं। ये चैनल थे 'स्टार प्लस', 'स्टार मूवीज' और 'एमटीवी'। तब इन चैनलों पर न हिंदी शो आते थे, न हिंदी फिल्में और न हिंदी गाने। 'स्टार' की सोच थी कि दर्शक धीरे-धीरे अंग्रेजी पर शिफ्ट हो जाएंगे और हिंदी वाले केवल 'जीटीवी' से अपना काम चलाते रहेंगे।

    दो साल ही बीते थे कि जीटीवी की सफलता की तूती हर तरफ सुनाई देने लगी। आलम यह था कि लोग शाम को अपना टीवी तब चालू करते थे, जब जीटीवी शुरू होता था। 1993 से स्टार का पाला भारतीय दर्शकों से पड़ा था, दो साल में ही उन्हें हिंदी की ताकत समझ आ गई थी। वे जान गए थे कि उधार के जीटीवी से लंबे समय तक बात नहीं बन सकती। 1996 में उन्होंने 'जीटीवी' से करार खत्म किया और अपने प्राइम चैनल 'स्टार प्लस' पर हिंदी के शो दिखाना शुरू कर दिए। ऐसा 'एमटीवी' के साथ भी हुआ, वहां भी अब भारतीय धुनें सुनाई देने लगी थीं। अंग्रेजी दर्शकों को स्टार ने 'स्टार वर्ल्ड' पर शिफ्ट करने के लिहाज से यह नया चैनल शुरू कर दिया।

    डिजीटल दुनिया में यही वो दौर था जब हिंदी ने पहली बार अपनी ताकत दिखाई थी। इसके बाद किसी भी नेटवर्क ने यह गलती नहीं की कि हिंदी की उपेक्षा के बारे में सोचा हो। चैनलों ने तो खैर बाद में हिम्मत ही नहीं की, मोबाइल कंपनियों ने भी तुरंत बदलाव किए। एसएमएस ने तो सबसे पहले अंग्रेजी छोड़ी ही, अॉपरेटिंग सिस्टम तक में इन कंपनियों ने हिंदी का विकल्प शामिल कर लिया। नोकिया ने तो अपना एक प्रचार अभियान ही हिंदी उपभोक्ताओं के लिए शुरू किया था। ये बदलाव तब तक इंटरनेट तक भी दिखना शुरू हो गए थे। वेबसाइट, ऐप... अब सब हिंदी में है। तो आज जब आप हिंदी में गूगल करें, हिंदी ऐप चलाएं... इन सब में हिंदी की ताकत को जरूर महसूस कीजिएगा।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें