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    5-10 उद्योगपतियों की है भाजपा की गुजरात सरकार : राहुल गांधी

    Published: Mon, 13 Nov 2017 10:42 PM (IST) | Updated: Tue, 14 Nov 2017 09:40 AM (IST)
    By: Editorial Team
    rahul- 13 11 2017

    अहमदाबाद। भाजपा व पाटीदारों के गढ़ मेहसाणा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 'नवसर्जन यात्रा' में प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी पर जमकर हमला बोला।

    पाटीदार आरक्षण आंदोलन को याद करते हुए राहुल ने कहा कि यह सरकार 5-10 उद्योगपतियों की है। जनता से बात करना इन्हें पसंद नहीं।

    पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान मोढ़ेरा चौराहे से कुछ आगे जहां गृह राज्यमंत्री रजनीकांत पटेल के बंगले को उग्र पाटीदार युवकों ने आग के हवाले कर दिया था।

    वहीं स्वामीनारायण मंदिर के पास पाटीदारों से आगामी चुनाव में समर्थन मांगने पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि 22 साल से प्रदेश के लोगों की आदत सिर्फ सुनने की थी।

    मोदीजी हर पांच दिन बाद मन की बात करते हैं। जब पहली बार पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर व दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने अपने समाज के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की तो उनको दबाया गया, कुचला गया।

    गुजरात की आवाज को दुनिया की कोई ताकत दबा नहीं सकती। आगामी दिसंबर में जनता इसका जवाब देगी और सरकार से अपने पैसे का हिसाब लेगी।

    राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने 35 हजार करोड़ की मनरेगा योजना से देश में करोड़ों लोगों को रोजगार दिया। जबकि गुजरात सरकार ने इतने ही रुपये टाटा नैनो के लिए दे दिए।

    आज सड़क पर एक भी नैनो कार नजर नहीं आती। ये पैसा गुजरात के व्यापारी और युवाओं पर खर्च होता तो आज गुजरात बदल गया होता। राहुल ने कहा कि आज हर शर्ट, साड़ी और मोबाइल पर 'मेड इन चाइना' नजर आता है।

    अगर पूरा गुजरात मिलकर ठान ले तो चीन का युवा सेल्फी लेगा और मोबाइल के पीछे लिखा होगा मेड इन मेहसाणा, मेड इन गुजरात। यह काम मैं अकेले या मेरा भाषण नहीं कर सकता।

    इसके लिए गुजरात के युवा, महिलाओं और पुरुषों को मिलकर काम करना होगा। राहुल के दौरे का यह चौथा और अंतिम चरण था।

    कांग्रेस को इन यात्राओं से लगने लगा है कि राज्यसभा चुनाव में जीत की तरह विधानसभा चुनाव भी जीता जा सकता है। इसलिए वह आंदोलनकारी युवा नेताओं के साथ खुलकर सामने आ गई है।

    कांग्रेस पर भले ही जातिवादी राजनीति का आरोप लग रहा है, लेकिन उसके पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है। उधर, भाजपा भी चुनाव प्रचार के लिए केंद्रीय नेताओं की फौज उतार चुकी है।

    आरोप-प्रत्यारोपों का दौर ऐसा चल रहा है कि गुजरात चुनाव में केंद्र के मुद्दे हावी नजर आते हैं। कांग्रेस भी गुजरात सरकार की कमी निकालने की बजाय केंद्र सरकार के फैसलों को गलत ठहराने की कोशिश कर रही है।

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