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    राजवाड़ा के पास 236 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर की दीवार गिरी

    Published: Tue, 18 Jul 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 10:06 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लोक निर्माण द्वारा खतरनाक घोषित राजवाड़ा के पास स्थित 236 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर के ऊपरी हिस्से की दीवार गिर गई। मंदिर का बाहरी हिस्सा गिरता तो इससे जनहानि होती, क्योंकि यह राजवाड़ा के पास व्यस्त बाजार में है।

    मंदिर के जीर्णोंद्धार के लिए कमिश्नर कार्यालय ने करीब एक करोड़ की योजना भी बनाई है। इसके लिए बजट मंजूरी का प्रस्ताव धर्मस्व विभाग को महीनों पहले भेजा गया था, लेकिन वहां से स्वीकृति नहीं मिली। दीवार गिरने की खबर के बाद मंदिर प्रशासक और संभागायुक्त संजय दुबे ने योजना की स्वीकृति के लिए एक बार फिर प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है।

    मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए उन्होंने आईडीए से डीपीआर बनवाई थी। आईडीए ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए योजना तो बना दी, लेकिन पैसा मंजूर होने के बाद ही इसका काम शुरू होगा। मंदिर के प्राचीन स्वरूप को बनाए रखते हुए ही इसका जीर्णोद्धार किया जाएगा।

    होलकर राजवंश ने किया था निर्माण

    मंदिर का निर्माण महाराजा मल्हारराव होलकर की महाराष्ट्र से आई रानी हड़कूबाई ने करवाया था। अहिल्याबाई की सास हड़कूबाई महानुभाव पंथ से जुड़ी थीं, इसीलिए महाराजा ने उनकी आस्था का सम्मान करते हुए राजवाड़ा के पास ही बांके बिहारी मंदिर के निर्माण की सहमति दी। बांके बिहारी भगवान कृष्ण का ही एक रूप है। देशभर में महानुभाव पंथ से जुड़े लोग बांके बिहारी को मानते हैं। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश सहित कई अन्य इलाकों में इस पंथ को मानने वाले श्रद्धालु हैं।

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