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    विकास से भी होती है आनंद की अनुभूतिः शुक्ला

    Published: Sat, 14 Jan 2017 07:36 PM (IST) | Updated: Sat, 14 Jan 2017 07:36 PM (IST)
    By: Editorial Team

    रीवा। स्वागत भवन वृद्घ आश्रम परिसर में दो दिवसीय आनंदम कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रदेश शासन के उद्योग, खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने कहा कि विकास भी आनंद का प्रतीक है। इससे भी आनंद की अनुभूमि होती है। शहर अच्छा हो, सड़कें अच्छी हों। नहरों में जब बाणसागर का पानी बहता है तो किसानों को जो आनंद उसे देखकर प्राप्त होता है उसे बयां नहीं किया जा सकता। इस दौरान उन्होंने कई छोटी-छोटी घटनाओं का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों के लिए हर स्तर पर सोच रही है और आनंदम भी उसी की कड़ी है।

    दान से मिले आनंद को बयां नहीं कर सकतेः शिवराज

    दान करने से जो आनंद मिलता है उसे बयां नहीं किया जा सकता है। अपनी जरूरत से ज्यादा जो भी सामान हो उसे दूसरों के लिए दें। जिससे जरूरतमंद उसका उपयोग कर अपनी जरूरत पूरी कर सकें। इससे जरूरतमंद की जरूरत पूरी होगी तो आपको आनंद की प्राप्ति होगी। जीवन में आनंद ही सबकुछ है। कुछ इस तरह की बातें प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को प्रोजेक्टर के माध्यम से रीवा में शुरू हुए आनंदम कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहीं। वे प्रदेश में एकसाथ प्रोजेक्टर के माध्यम से लोगों को आनंदम कार्यक्रम और लोग आनंद कैसे प्राप्त कर सकते हैं इसको लेकर बोल रहे थे। स्कूल के पाठ्यक्रम में भी आनंद को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि वेबसाइट का उपयोग कर आप भी इसका हिस्सा बनें।

    828 पंचायतों में क्लस्टर गठित

    आनंदम कार्यक्रम लिए जिले की 827 पंचायतों में से 286 क्लस्टर का गठन किया गया है। 3 ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक क्लास्टर बनाया गया है जहां आनंदम कार्यक्रम आयोजित करके स्थानीय खेल एवं कला सहित आनंद प्राप्त होने वाले अन्य तरह के कार्यक्रम किए जा रहे हैं। कलेक्टर राहुज जैन ने बताया कि क्लस्टर स्तर पर इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। लगभग डेढ़ सौ आनंदम का पंजीयन हुआ है।

    बनाई गई नेकी की दीवार

    अपनी बचत की चीजों का लोग जरूरतमंदों तक पहुंचा सके इसके लिए वृद्घ आश्रम में नेकी की दीवार बनाई गई है। जिसमें लोग पहुंचकर कपड़े, जूते, किताब, कॉपी, खिलौने सहित अन्य जरूरत की चीजों को दान के रूप में दे रहे हैं। जरूरतमंद लोग नेकी की दीवार से ऐसी जरूरत की चीजें प्राप्त भी कर रहे हैं।

    खेलों से मानसिक तनाव दूर

    कुर्सी दौड़ में शामिल हुई प्रीतिमा भारद्वाज ने कहा कि खेलों से मानसिक तनाव दूर होता है और इससे आनंद की प्राप्ति होती है। मैं स्वयं अभी कुर्सी दौड़ में हिस्सा ली। जिस समय खेल रही थी उस समय जीवन के हर तनाव से मुक्त होकर आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा था।

    संगीत में है शक्ति

    आनंदम बने जगजीवनलाल तिवारी ने कहा कि हमारे विंध्य धरा में गाने और बजाने की वर्षो पुरानी परम्परा रही है। यहां के विवाह गीत, लोकगीत, बरुआ गीत, बरहौं गीत सहित कजरी व अन्य तरह के गीत जब गाए जाते हैं तो उसका एक अलग ही आनंद प्राप्त होता है। कार्यक्रम के माध्यम से ऐसी कलाओं को भी महत्व दिया जा रहा है।

    फोटो-17 - आनंदम कार्यक्रम के शुभारंभ पर मंचासीन मंत्री व अन्य अतिथि।

    18 -आनंद कार्यक्रम में मौजूद महिला-पुरूष।

    19 -कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र देते अतिथि।

    21 -कुर्सी दौड़ में दौड़ लगाती महिलाएं।

    आनंदम कार्यक्रम को किया संबोधित, नेकी की दीवार बनी दान और आनंद का केन्द्र

    और जानें :  # aanandam # rewa
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