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    किशोरी की आंख से निकल रही रुई, डॉक्टर समझ नहीं पाए, पिता झाड़-फूंक में लगे

    Published: Wed, 06 Sep 2017 07:46 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Sep 2017 10:14 AM (IST)
    By: Editorial Team
    indian girl eye 201797 82531 06 09 2017

    अनूपपुर। कोतमा जनपद के ग्राम खमरौध के पचखुरा गांव में 11 साल की मानसी के आंख से पिछले 15 दिन से रुई निकल रही है। मानसी के पिता गेंदलाल केवट इसे भूत-प्रेत का साया समझकर उसकी झाड़-फूंक करने में जुट गए। गांव वालों भी इसे दैवीय प्रकोप या भूत-प्रेत का साया समझकर उसके घर से दूरी बनाकर रख रहे हैं। अंधविश्वास इस हद तक है कि किसी विशेषज्ञ से जांच कराना भी जरूरी नहीं समझा। इस बारे में जब नईदुनिया ने विशेषज्ञों से बात की तो पता चला कि स्प्रिंग कटार या बिटोड स्पॉट बीमारी के कारण ऐसा होता है।

    35 से 40 बार निकले

    कक्षा 6 वीं की छात्रा है जिसकी आंखो से 25 अगस्त से अपने आप ही रुई और धागे निकलने शुरू हो गए। मानसी को 35 से 40 बार रुई एवं धागों के छोटे-छोटे टुकड़े निकल रहे हैं। मानसी के पिता किसान हैं। उन्होंने अभी तक मानसी को किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से उसकी जांच नहीं कराई।

    लोकल डॉक्टरों के लिए पहला केस

    गांव के लोकल डॉक्टरों के लिए यह पहला केस है। स्वास्थ्य शिविर मे उसे लोकल डॉक्टर से जांच कराई तो यह केस उनकी समझ में भी नहीं आया। उन्होंने नेत्ररोग विशेषज्ञ से जांच कराने कहा। लेकिन मानसी के पिता ने उसकी जांच अभी तक नेत्ररोग विशेषज्ञ से नहीं कराई।

    नेत्ररोग विशेषज्ञों के अनुसार ये हैं बीमारी के कारण

    स्प्रिंग कटार - मेडिकल कॉलेज जबलपुर के डीन और नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. नवनीत सक्सेना का कहना है कि ऐसा एलर्जी के कारण होता है। इसमें आंख से सफेद स्त्राव व धागा जैसा निकलता है। करीब 17 या 18 साल की उम्र तक हार्मोनल बदलाव होने के बाद यह ठीक हो जाती है। मेडिकल कॉलेज में इसका इलाज संभव है।

    बिटोड स्पॉट - नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. पवन स्थापक का कहना है कि यह विटामिन ए की कमी से होती है। बचपन से इसमें कुपोषण की स्थिति होती है। इसमें आंख के बाहरी ओर से सफेद स्त्राव निकलता है। यह रुई जैसा दिखता है।

    इनका कहना है

    हमारी बेटी जल्दी ठीक हो जाए। मंगलवार को डॉक्टर कुरैशी भी हमारे घर आए थे और रूई व धागा लेकर गए है।

    -गेंदलाल केवट मानसी के पिता

    इस तरह की घटना मैने पहली बार सुनी है। मानसी केवट को झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तुरंत चिकित्सालय में दिखाना चाहिए जिसे हमारे डॉक्टरों द्वारा देखकर यह कहा जा सके की मानसी का इलाज किस तरह संभव है।

    - आरपी श्रीवास्तव सीएमएचओ अनूपपुर

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