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    सरदार सरोवर बांध की फर्जी रजिस्ट्री मामले में गिरफ्तारी और तलाश रुकी

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    -सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर पुलिस असमंजस्य में, कानून विशेषज्ञों की ली जा रही राय

    बागली। नईदुनिया न्यूज

    सरदार सरोवर बांध की फर्जी रजिस्ट्रियों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नर्मदा बचाओ आंदोलन के सदस्यों की याचिका पर सुनाए गए फैसले के बाद शिकायत निवारण प्राधिकरण सरदार सरोवर परियोजना मध्यप्रदेश प्रभावितों को फिर से मुआवजा देने के लिए विज्ञप्ति निकाल चुका है। इधर पुलिस महकमा असमंजस्य का शिकार है। फरवरी से बागली थानांतर्गत दर्ज प्रकरणों की जांच के लिए गठित एसआईटी ने आरोपियों की गिरफ्तारी और तलाश को रोक दी है। बताया जा रहा है कोर्ट के फैसले को समझने के लिए कानून विशेषज्ञों की राय ली जा रही है।

    जानकारी के अनुसार सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों के मुआवजा वितरण के दौरान सामने आए फर्जी रजिस्ट्री मामले की झा आयोग की जांच पूर्ण होकर प्राप्त होने पर प्रदेश सरकार ने आयोग की रिपोर्ट में दोषी करार दिए गए आरोपियों के खिलाफ विभिन्ना जिलों के थानों में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इस पर बागली थाने में 80 नवीन प्रकरण दर्ज किए गए थे। जबकि पूर्व में 48 प्रकरण दर्ज थे, लेकिन कोर्ट के स्टे के कारण उनकी जांच रूकी हुई थी। इस तरह बागली पुलिस को कुल 128 प्रकरणों में लगभग 466 आरोपियों को हिरासत में लेना था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने मामलों की संख्या और जांच के मद्देनजर एसआईटी का गठन किया था। जिसने 108 मामलों में 60 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लेकर बागली न्यायालय में पेश भी किया था।

    अधिकांश आरोपियों की हो चुकी है जमानत

    10 अप्रैल तक की सूचनाओं के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से अधिकांश की जमानत हो चुकी थी। लेकिन 3 पुरुष बागली जेल में न्यायिक अभिरक्षा में थे, जबकि एक महिला देवास जेल में न्यायिक अभिरक्षा में थी। आरोपियों में से कुछ की मृत्यु हो चुकी थी जबकि कई आरोपी 60 से अधिक वर्ष के थे। वहीं बागली जेल में कुछ माह तक निरूद्घ रहे मानसिंहपुरा निवासी नत्थू पिता सुखराम (75) और दरियाव निवासी मानसिंहपुरा वयोवृद्घ थे और उन्हें उठाने बैठाने और नित्यकर्म के लिए कैदियों का सहारा लेना पड़ता था।

    समझने के बाद ही लेंगे अगला निर्णय

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारियां रोक दी गई है। मामले को लेकर एसआईटी प्रभारी एवं कांटाफोड़ थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया न्यायालय के फैसले में झा आयोग की जांच को लेकर कुछ निर्देश हैं। इसके लिए देवास में एक बैठक हुई थी, जिसमें जिला अभियोजन अधिकारी भी शामिल थे। फैसले को समझने के लिए कानून विशेषज्ञों के मत की आवश्यकता है। कानूनविदों का मत सामने आने के बाद ही एसआईटी अगला निर्णय लेगी। तब तक के लिए मामलों में नवीन कार्य रूका हुआ है।

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