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    मौसम ने बिगाड़ी रंगत, धान पर कीटों का हमला

    Published: Mon, 18 Sep 2017 12:24 AM (IST) | Updated: Mon, 18 Sep 2017 12:24 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बालाघाट। नईदुनिया प्रतिनिधि

    बिगड़ैल मौसम ने खरीफ सीजन की फसलों की रंगत बिगाड़ दी है। बारिश की लेट-लतीफी और आसमान पर छाए बादलों से खरीफ की फसल पर कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। धान की फसल में रोग भी लग रहा है। प्रारंभिक खेती के दौरान ही करीब 25 फीसदी धान प्रभावित हुई है। वहीं अब कमजोर किसानी के बीच मानसून ने धोखा दे दिया है जिससे किसानों को धान की फसल बचाने तरह-तरह के जतन करने पड़ रहे हैं। धान में लग रहे रोग पर नियंत्रण पाने कोई भी उपाय काम नहीं आ रहे हैं। वहीं कीटनाशक भी बेअसर साबित हो रहे हैं जिससे कीटों का हमला भी तेजी से बढ़ रहा है। आम किसान तो दूर कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन के खेत में लगी धान में कीट व रोग लग रहा है। कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने खेत में एक एकड़ में चिन्नौर व 10 एकड़ में जीरा शंकर किस्म की धान लगाई है।

    बारिश हुई तो भी नहीं संवरेगी धान

    मानसून की बेरुखी और फसलों पर बढ़े रोग के बीच तेज धूप होने की वजह से किसान धान की निंदाई भी नहीं करा पाए हैं। नींदानाशक से धान झुलसने का खतरा बढ़ गया है। वहीं खाद डालने से धान की बजाय कचरा बढ़ रहा है जिससे धान की फसल बिगड़ रही है। किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से पहले ही धान खराब हो चुकी है। अब कीट व रोग से धान खराब हो रही है। अब बारिश भी हुई तो धान संवरती दिखाई नहीं दे रही है।

    तना छेदक व ब्लास्टर कीट का हमला

    बोदाटोला निवासी सुखराम चौहान के अनुसार, धान की फसल में इन दिनों तना छेदक व ब्लॉस्टर का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान समय में जो कीटनाशक बाजार में मिल रही है। असरकारक साबित नहीं हो रही है। गंगई रोग से नई किस्म की धान करीब 50 फीसदी खराब हुई है। जबकि भारी धान में इसका असर कम है। धान के कमजोर पड़े पौधे को संवारने जितनी आवश्यकता पानी की है, उतनी ही खाद की भी लेकिन पहले की तरह यूरिया खाद भी अच्छे परिणाम नहीं दे पा रही है। कमजोर पौधा संभल नहीं पा रहा है।

    धान को बचाने नहरों में छोड़ा पानी

    बारिश की लेटलतीफी से धान की फसल का रकबा प्रभावित हुआ है। शेष रकबे में लगी धान को बचाने के लिए पानी की आवश्यकता पड़ रही है। बारिश नहीं होने से सूख रही धान को बचाने प्रशासन ने नहरों में पानी छोड़ा है। एक ओर जलाशय खाली हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर हुई नहरों से पर्याप्त पानी नहीं बह पा रहा है।

    उत्पादन में आएगी कमी

    कृषक बैसाखु के अनुसार, पहले ही रोपाई के दौरान काफी बीज और रोपा खराब हो गया है। इसके बाद, कीट से उन्नत किस्म की हाइब्रिड धानें काफी मात्रा में खराब हो गई हैं। लगातार खरीफ सीजन की फसल पर मौसमी उतार चढ़ाव से बुरा असर पड़ा है जिससे उत्पादन में कमी आएगी। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि मौसम की खराबी से धान की फसल काफी खराब हुई है। इससे उत्पादन में बुरा असर पड़ा है। करीब 60 फीसद रकबे में ही उत्पादन के आसार नजर आ रहे हैं।

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    कम बारिश से जिले कटंगी क्षेत्र में काफी रकबा प्रभावित हुआ है। 25 सितंबर तक जिले में कितनी बारिश दर्ज होती है। मौजूदा जलस्रोतों की स्थिति और फसल के अनुमान के आधार पर जिले के सूखे की स्थिति का अनुमान लगाया जाएगा। कुछेक क्षेत्रों में फसल में रोग की शिकायत मिल रही है। किसानों को उपचार के लिए सलाह दी जा रही है।

    -राजेश त्रिपाठी, उपसंचालक, कृषि विभाग बालाघाट।

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