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    एक महीने में शिक्षा के स्तर के साथ कार्यप्रणाली में करो सुधार

    Published: Sun, 13 Aug 2017 04:01 AM (IST) | Updated: Sun, 13 Aug 2017 04:01 AM (IST)
    By: Editorial Team

    एक महीने में शिक्षा के स्तर के साथ कार्यप्रणाली में करो सुधार

    40 प्रतिशत से कम नतीजे लाने वाले प्राचार्यों को कलेक्टर ने लगाई फटकार

    कलेक्टर ने ली प्राचार्यों की क्लास, कइयों को लगी कड़ी फटकार

    - 90 प्रतिशत से अधिक और 40 प्रतिशत से कम वाले प्राचार्यों की बैठक

    - गुणवत्ता उन्नयन के लिए आयोजित की गई कार्यशाला में दिया मार्गदर्शन

    - बेहतर नतीजे लाने वाले प्राचार्यों ने बताए सफलता हासिल करने के गुर

    - स्कूलों में नवाचार करने वाले प्रधानपाठकों ने भी साझा की अपनी पहल

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    बैतूल। कार्यशाला में उपस्थित हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी स्कूल प्राचार्य।

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    बैतूल। कलेक्टर ने एक-एक प्राचार्य से पूछे कम रिजल्ट के कारण।

    बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

    हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में 40 प्रतिशत से कम नतीजे लाने वाले प्राचार्यों की शनिवार को आयोजित कार्यशाला में क्लास लग गई। कार्यशाला में पहुंचे कलेक्टर शशांक मिश्र ने कई प्राचार्यों को कड़ी फटकार लगाई और एक महीने में शिक्षा के स्तर और अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की सख्त हिदायत दी। ऐसा नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहने की हिदायत भी दी। इस दौरान 90 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट लाने वाले प्राचार्यों और अपने स्कूलों में नवाचार करने वाले माध्यमिक स्कूलों के प्रधानपाठकों ने भी अपनी सफलता के राज और नवाचार की जानकारी दी।

    शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आदिम जाति कल्याण विभाग के सभाकक्ष में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्यों की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें केवल उन स्कूलों के प्राचार्यों को बुलवाया गया था जिनका 10 वीं और 12 वीं का रिजल्ट 90 प्रतिशत से अधिक था या फिर 40 प्रतिशत से कम रहा। बेहतर रिजल्ट वाले 29 और कम रिजल्ट वाले 40 प्राचार्य कार्यशाला में पहुंचे। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार था। कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी बीएस बिसोरिया, सहायक आयुक्त अमरनाथ सिंह, योजना अधिकारी सुबोध शर्मा उपस्थित थे। कार्यशाला में कलेक्टर शशांक मिश्र भी पहुंचे। कलेक्टर श्री मिश्र ने पहुंचते ही एक-एक कर प्राचार्यों से कम रिजल्ट के कारण पूछने शुरू किए। शुरूआत चूनालोहमा हाईस्कूल की प्रभारी प्राचार्य से हुई। पूर्व में कलेक्टर जब इस स्कूल में गए थे तो उस दिन प्रभारी प्राचार्य स्वयं ही गैरहाजिर थीं। प्रभारी प्राचार्य ने जब कम रिजल्ट के कारण बताने शुरू किए तो बीच में ही टोकते हुए कलेक्टर श्री मिश्र बोले कि आप स्वयं भी देरी से स्कूल आती हैं। उन्होंने गैरहाजिर रहने की वजह भी पूछी। इस पर प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि उस दिन उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इसके लिए फटकार लगाने के अलावा अन्य शिक्षकों पर नियंत्रण न होने के लिए भी उन्हें खासी फटकार लगी। इस पर प्राचार्य का कहना था कि वे चूंकि प्रभारी हैं इसलिए उनकी शिक्षक नहीं सुनते हैं। इस पर कलेक्टर ने उनसे कहा कि उन्हें प्राचार्य के सारे अधिकार दिए गए हैं, उनका पालन करें। इसके बाद अन्य प्राचार्यों से भी एक-एक कर कम रिजल्ट के कारण पूछे गए। इस बीच जहां वास्तव में समस्या नजर आईं उसका निराकरण करने के आदेश भी अधिकारियों को दिए। इसके अलावा जहां प्राचार्यों की लापरवाही नजर आई, उसके लिए संबंधितों को फटकार लगाते हुए तत्काल कार्यप्रणाली में सुधार की हिदायत दी गई।

    एक महीने की दी मोहलत

    कार्यशाला में भले ही कलेक्टर के तेवर तीखे थे, लेकिन इस बात पर सभी प्राचार्यों ने खैरियत मनाई कि आज किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। कम रिजल्ट वाले सभी प्राचार्यों को शिक्षा के स्तर और अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। एक माह बाद जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त द्वारा पुनः समीक्षा की जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस बीच जो सुधार होता है, उसे विचार कर कार्रवाई किए जाने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

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    इन्होंने बताए अपनी सफलता के राज

    कार्यशाला में 90 प्रतिशत से अधिक का रिजल्ट लाने वाले प्राचार्यों ने वे तौर-तरीके और कार्यप्रणाली अन्य प्राचार्यों को बताई जिनके सहारे उन्होंने इतना अच्छा रिजल्ट लाया। अधिकारियों ने अन्य प्राचार्यों को भी इस तरह की कार्यप्रणाली अपना कर अपनी-अपनी शाला का रिजल्ट बेहतर लाने के लिए प्रेरित किया। मुख्य बिंदु के अलावा कार्यशाला के लिए 20 बिन्दुओं का एजेंडा भी तय था। इसमें मुख्य रूप से बोर्ड परीक्षा का शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम, विभागीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन, शिक्षकों की पूरे समय उपस्थिति, शाला परिसर का अनुकूल माहौल, शिक्षकों को दण्ड एवं पुरस्कार और आवासीय छात्रावासों का गुणवत्तापूर्ण संचालन आदि विषय प्रमुख रूप से शामिल है।

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    बगैर अबेकस पलक झपकते ही हल

    कार्यशाला में मिडिल स्कूल के उन प्रधान पाठकों को भी प्रमुख रूप से बुलाया गया था, जिन्होंने कि अपने यहां कोई नवाचार किया है। इसमें प्राथमिक शाला ताईखेड़ा में वहां के प्रधानपाठक द्वारा बच्चों की गणित में रूचि उत्पन्न करने उम्दा प्रयास किए हैं। यही कारण है कि कक्षा 4 थी, 5 वीं के बच्चों को 40-50 तक के पहाड़े कंठस्थ याद है। इतना ही नहीं बड़ी संख्या के गुना, भाग, जोड़, घटाना वे पलक झपकते ही कर लेते हैं। इसकी वजह प्रधानपाठक द्वारा सिखाई गई स्पेशल ट्रिक है। यही कारण है कि अबेकस जैसी कक्षाएं ज्वाइन किए बगैर वे ऐसा कर लेते हैं। इन प्रधानपाठकों द्वारा भी अपनी-अपनी स्पेशल ट्रिक और कठिन विषयों में रूचि जागृत करने अपनाए गए तौर-तरीकों की जानकारी दी गई।

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