Naidunia
    Thursday, December 14, 2017
    PreviousNext

    छोटे गांवों और मजरे-टोलों को रोशन करने की राह में एनओसी का अड़ंगा

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

    छोटे गांवों और मजरे-टोलों को रोशन करने की राह में एनओसी का अड़ंगा

    - जिले में कई स्थानों पर रूका है वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने से योजना का काम

    - 144 करोड़ की दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से पहुंचेंगी 290 गांवों में बिजली

    - लम्बे समय बाद भी एनओसी नहीं मिलने से योजना के काम में होती जा रही लेटलतीफी

    फोटो-----13 बीटीएल 6, 7

    बैतूल। भैंसदेही तहसील के लोकलदरी गांव में बिजली पहुंचने का इंतजार।

    केस-1ः लोकलदरी

    जिले के दक्षिण वन मंडल के कुकरू खामला क्षेत्र में स्थित लोकलदरी गांव में 125 कनेक्शनधारियों तक योजना के तहत बिजली पहुंचाई जानी है। इसके लिए 11 जनवरी 2017 को एनओसी के लिए आवेदन दिया गया, लेकिन अभी तक एनओसी नहीं मिली। फीडर निकालने की एनओसी भी नहीं मिली है।

    केस-2ः खपरवाड़ी

    जिले के पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाले खपरवाड़ी गांव में बिजली पहुंचाने के लिए मई माह में आवेदन दिया गया था। यहां 2.3 किलोमीटर बिजली लाइन जंगल में बिछाना है। यहां के लिए भी अभी तक एनओसी नहीं मिली है। इससे यहां 70 परिवारों तक बिजली नहीं पहुंच पा रही है।

    केस-3ः मुलताई

    जिले के दक्षिण वन मंडल के अंतर्गत आने वाले ग्राम गेहूंबारसा और वायगांव के आसपास के कुछ मजरे-टोलों तक बिजली पहुंचाने के लिए इन दोनों स्थानों पर एनओसी चाहिए जो कि अभी तक नहीं मिली है। क्षेत्र में 4 स्थानों के लिए तो एनओसी मिल गई पर यहां अभी तक नहीं मिलने से काम अटका है।

    बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

    100 या इससे अधिक की आबादी वाले जिले के 290 गांवों को रोशन करने के लिए चल रही दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की राह में कई जगह फॉरेस्ट की एनओसी अड़ंगा बन रही है। समय पर और जल्दी एनओसी नहीं मिलने के कारण इन गांवों में बिजली पहुंचाने में लेटलतीफी हो रही है। योजना के तहत 144 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इन गांवों के लोग आजादी के इतने बरस बाद भी बिना बिजली के गुजारा करने को विवश हैं।

    ग्राम ज्योति योजना के तहत वैसे तो पिछले साल ही काम शुरू कर दिया गया था, लेकिन जैसे-जैसे काम आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे कई समस्याएं भी सामने आ रही हैं। बिजली से वंचित अधिकांश ग्राम वन क्षेत्रों में स्थित हैं या फिर इन गांवों तक पहुंचने के लिए वन क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में बिजली पहुंचाने का रास्ता भी वन क्षेत्रों से होकर ही गुजर रहा है। वन विभाग के नियमों के अनुसार वन क्षेत्र में यदि कोई काम करना है तो इसके लिए विधिवत शुल्क जमा कर एनओसी प्राप्त करना होता है। इसके बाद ही वहां काम किया जा सकता है। ग्राम ज्योति योजना के तहत भी कई स्थानों पर फॉरेस्ट की एनओसी की आवश्यकता पड़ रही है। कुछ स्थानों के लिए एनओसी मिल गई है तो अभी भी 4 ऐसे स्थान हैं जहां के लिए एनओसी का इंतजार किया जा रहा है। एनओसी नहीं मिलने से काम भी अटका हुआ है। एनओसी के मिले बगैर खंभे लगाने और लाइन खींचने का काम शुरू नहीं किया जा सकता।

    यह काम होने हैं योजना में

    योजना के तहत बिजलीविहीन 290 मजरे-टोलों तक बिजली पहुंचाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भरपूर बिजली पहुंचाने फीडर सेपरेशन और सब स्टेशन का निर्माण भी किया जाना है। प्रोजेक्ट के तहत कुल 103 फीडरों को अलग-अलग किया जाएगा। इससे गांव की बिजली अलग और खेत की बिजली अलग की जाएगी। इससे गांवों को 24 घंटे बिजली मिलेगी।

    बॉक्स-------------------------

    दो चरणों में होगा काम, अलग-अलग कंपनियां

    पूरी योजना का काम दो फेज में होगा। फेज-1 का काम 72 करोड़, 18 लाख की लागत से जबकि फेज-2 का काम 72 करोड़, 83 लाख की लागत से होगा। दोनों काम अलग-अलग कंपनियों को सौंपे गए हैं जो कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही है। योजना का काम पूरा होने के बाद छोटे-छोटे गांव और मजरे-टोले रोशन हो जाएंगे।

    वे बोले...

    खपरवाड़ी, लोकलदरी और मुलताई डिवीजन में कुछ स्थानों पर फॉरेस्ट की एनओसी नहीं मिलने के कारण रूका है। एनओसी लेने के लिए आवेदन किए जा चुके हैं और जल्द से जल्द एनओसी लेने के प्रयास किए जा रहे हैं। एनओसी मिलने के बाद काम शुरू कर दिए जाएंगे। अन्य क्षेत्रों में काम जारी है।

    -एनके रात्रे, नोडल अधिकारी, ग्राम ज्योति योजना, बैतूल

    और जानें :  # betul news
    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें