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    पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा व्रत और की पूजा-अर्चना

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

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    पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा व्रत और की पूजा-अर्चना

    - बलराम जयंती के उपलक्ष्य में भी हुए जगह-जगह आयोजन

    फोटो---13बीटीएल3

    बैतूल। छलछट का व्रत रख कर पूजा-अर्चना करते हुए महिलाएं।

    बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

    पुत्र की लम्बी उम्र की कामना करते हुए रविवार को हलछठ का व्रत रखा और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही आज किसानों और किसान संगठनों द्वारा बलराम जयंती भी मनाई गई। इस अवसर पर हल और भगवान बलराम की पूजा-अर्चना की गई। हलछठ का व्रत खासतौर पर संतान की दीघार्यु और सुख-सम्पन्नाता के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धा व उत्साह के साथ विधि-विधान से महिलाओं व्रत रखा और पूजा-अर्चना की। हलछठ पर्व पर महिलाओं ने मध्यान्ह काल में पलाश, कास एवं कुश के नीचे भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय एवं श्री गणेश की मूर्ति स्थापित कर धूप, दीप, पुष्प से भक्ति भाव से पूजन किया। इस पूजा में महुआ, पसई के चावल, चना, मक्का, गवार, सोयाबीन, धान की लाई, भैंस के दूध और गोबर का विशेष महत्व रहता है। ग्रामीण अंचलों में घर आंगन को गोबर से लीपकर घर आंगन में महुआ, बेर की डाली, कास के फूल से हलछठ स्थापित कर पूजा की गई। हलछठ माता को सतタजरा, तेल, चूड़ी, कागज, लकड़ी की ककई, बांस की टोकनी, आईना, छोटी-छोटी डबली, नारियल, केला, ककड़ी का प्रसाद चढ़ाया गया। मान्यता के अनुसार इस दिन हल की पूजा करते हैं, इसलिए हल से उत्पन्न वस्तुओं का सेवन भी नहीं किया गया। इसके साथ ही बलराम जयंती भी आज मनाई गई। किसानों ने भगवान बलराम और हल की पूजा-अर्चना की।

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