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    पुत्र की लंबी आयू के लिए माताओं ने रखा हलछठ का व्रत

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:03 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:03 AM (IST)
    By: Editorial Team

    पुत्र की लंबी आयू के लिए माताओं ने रखा हलछठ का व्रत

    रहटगांव। नवदुनिया न्यूज

    नगर में हलछठ का पर्व श्रद्घा व उत्साह के साथ मनाया गया हलछठ का व्रत माताओं द्वारा पुत्रों की दीर्घायु के लिए रखा गया और विधि-विधान से हलछठ की पूजा अर्चना की गई। हलषष्ठी व्रत में महिलाओं ने प्रातःकाल से ही स्नानादि आदि से निवृत होकर नित्यक्रम करने के पश्चात हलषष्ठी व्रत धारण करने का संकल्प उत्तराभिमुख होकर किया। बलराम जयंती पर होने वाले इस पर्व पर हल की पूजा अर्चना होती है। बलराम जी को हलधर कहा जाता है उनकी जयंती के दिन हलछठ के नाम से यह पर्व मनाया जाता है। पंडित नीरज महाराज ने बताया कि इस दिन हलछठ की पूजा में महुआ, पसई के चावल, चना, मक्का, ज्वार, सोयाबीन व धान की लाई व भैंस के दूध व गोबर का विशेष महत्व रहता है। हलछठ के दिन दोपहर में घर-आंगन में महुआ, बेर की डाल, कांस के फूल से हलछठ स्थापित कर श्रद्घाभाव से पूजा अर्चना की और सतगजरा सहित तेल, चूड़ी, काजल, लकड़ी की ककई, बांस टुकनिया, आईना छोटी-छोटी डबली, नारियल, केला, ककड़ी का प्रसाद चढ़ाया।

    कहानियां सुनाई

    माताओं ने ठिंगरिया-मुंगरिया की प्रचलित कहानियां सुनी और कथा का वाचन किया। हलछठ पर्व के तहत बाजार में चहल-पहल रही। पूजा अर्चना के बाद उपवास रखने वाली माताओं ने महुआ की चाय व पसई के चांवल का सेवन किया तथा कुंवारी कन्याओं को बांस की टोकनी में लाई, नारियल, महुआ,चना, सोयाबीन, धान की लाई आदि प्रसाद के रूप में वितरण किया गया। उल्लेखनीय है कि महिलाए भादों माह के छठी तिथि को अपने पुत्रों के दीर्घायु और भलाई की कामना के साथ निर्जला उपवास रखकर कोस कुसा से बनी छठ की पूजा करती हैं। वो अनाज का पारण नहीं करतीं है।

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