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    शहीद की अंत्येष्टि में शोक फायर नहीं किए, मंत्री आर्य और STF टीम को घेरा

    Published: Fri, 17 Feb 2017 10:55 PM (IST) | Updated: Sat, 18 Feb 2017 04:01 PM (IST)
    By: Editorial Team
    bhindnews 2017217 23837 17 02 2017

    भिंड (गोहद)। नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए एसटीएफ जवान जितेंद्र चतुर्वेदी की अंत्येष्टि में सलामी के दौरान शोक फायर नहीं किए गए। शहीद के रिश्तेदारों ने शोक फायर की मांग कर एसटीएफ के एएसआई विजय देवदास और अंतिम संस्कार में पहुंचे राज्यमंत्री लालसिंह आर्य को घेर लिया। मंत्री आर्य ने एसपी अनिल सिंह से फोन पर बात की तो एसपी ने जिंदा कारतूस नहीं चलाने की बात बताई। लोगों को समझाने के लिए एसटीएफ एएसआई ने कहा हम छत्तीसगढ़ में पार्थिव देह लाने से पहले शोक फायर कर चुके हैं।

    15 फरवरी को छत्तीगढ़ के थाना मरदापाल क्षेत्र में नक्सलियों से मुठभेड़ जवान जितेंद्र चतुर्वेदी शहीद हो गए थे। शहीद की अंत्येष्टि शनिवार को गोहद में की गई। अंतिम संस्कार के दौरान छत्तीगढ़ से पार्थिव देह लेकर आई एसटीएफ की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान सिर्फ शस्त्र झुकाकर सलामी दी।

    मुखाग्नि से पहले टुकड़ी से शोक फायर नहीं किए। इससे नाराज शहीद के रिश्तेदारों ने एसटीएफ एएसआई देवदास और अंतिम संस्कार में मौजूद राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य को घेर लिया। एसटीएफ एएसआई ने कहा उन्होंने शोक फायर करने के लिए एसपी से परमिशन मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। इसके बाद लोगों ने हंगामा किया।

    शहीद के नाम पर होगा सड़क और स्कूल का नाम

    मंत्री आर्य ने शोक फायर को लेकर एसपी और आईजी उमेश जोगा से बात की तो भी फायर नहीं करने की बात सामने आई। मंत्री ने लोगों से कहा एसटीएफ का कहना है यह लोग छत्तीसगढ़ में शोक फायर कर चुके हैं। अब प्रावधान नहीं है। लोगों ने हंगामा किया तो मंत्री ने मानकपुर से पिथनपुर रोड और प्राइमरी स्कूल का नाम शहीद जितेंद्र चतुर्वेदी के नाम से करने का आश्वासन दिया, तब लोग शांत हुए।

    अंतिम विदाई में होना थे शोक फायर

    इस पूरे मसले पर रिटायर्ड एएसपी शैलेंद्र पांडे का कहना है एसटीएफ की टुकड़ी जवान को सलामी देने के लिए ही आई थी। जवान सीआरपीएफ से एसटीएफ में गया था। इसलिए सलामी में शस्त्र झुकाने के बाद मुखाग्नि से पहले अंतिम विदाई के दौरान शोक फायर किए जाना चाहिए थे। रिटायर्ड एएसपी पांडे ने कहा आवाज वाले कारतूस नहीं थे तो ग्वालियर या एसएएफ से इंतजाम करना चाहिए था।

    इनका कहना है

    गार्ड ऑफ ऑनर नियमानुसार किया गया है। शोक फायर में जिंदा कारतूस नहीं चलाए जाते हैं।

    अनिल सिंह, एसपी भिंड

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