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    सात साल से संक्रमित हैं एंबुलेंस 108 , मरीजों को इन्फेक्शन का खतरा

    Published: Sat, 15 Apr 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Sat, 15 Apr 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

    भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

    पिछले सात सालों में हजारों मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस 108 खुद संक्रमण का शिकार हैं। वजह, एबुंलेस को संक्रमण मुक्त नहीं किया जा रहा है। गाड़ियों को कीटाणु रहित करने के लिए फिनायल तक नहीं है। वाहनों में फैला ब्लड भी सिर्फ पानी से साफ किया जा रहा है, जबकि अस्पताल में वही ब्लड साफ करने के लिए तय केमिकल का उपयोग किया जाता है।

    एंबुलेंस से कई बार ऐसे मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाता है, जिन्हें हेपेटाइटिस बी, सी जैसी खतरनाक संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। एक्सीडेंट में घायल मरीज से इन बीमारियों के फैलने का खतरा ज्यादा रहता है, घायल की चोट से एंबुलेंस में खून बहता रहता है। इसके बाद भी 2009 से अब तक एक भी एंबुलेंस को संक्रमण रहित करने की प्रक्रिया नहीं की गई। साल में एक या दो बार गाड़ियों को फार्मेलीन या दूसरे केमिकल से संक्रमण मुक्त किया जाना चाहिए। इसके लिए कम से कम 12 घंटे तक वाहन को पूरी तरह से बंद रखा जाता है, ताकि बैक्टीरिया और फंगस नष्ट हो सकें।

    इसके अलावा एंबुलेंस के कर्मचारियों को भी इससे खतरा है। कर्मचारियों का कहना है कि जिकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड (जेडएचएल) बचाव के लिए उन्हें दस्ताने और डिलीवरी किट तक नहीं दे रही है। पानी से सिर्फ एंबुलेंस की फर्श साफ की जा सकती है, लेकिन बैक्टीरिया और फंगस तो एंबुलेंस में कहीं भी हो सकते हैं।

    -5 किमी के भीतर पांच एंबुलेंस फिर भी नहीं मिली घायल को मदद

    लिंक रोड नंबर तीन पर एक्सीडेंट में घायल छात्रा को अस्पताल पहुंचाने के लिए बुधवार को एंबुलेंस नहीं मिली। मौके पर मौजूद लोगों ने 108 कॉल सेंटर पर फोन किया तो जवाब मिला कि हबीबगंज की एंबुलेंस अभी व्यस्त है। इस दौरान एमपी नगर, टीटी नगर, जेपी अस्पताल कोलार की एंबुलेंस भी मौके पर भेजी जा सकती थी, लेकिन कॉल सेंटर के कर्मचारियों ने एक एंबुलेंस को व्यस्त बताकर पल्ला झाड़ लिया। इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई।

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    ईएमटी को फिनायल दिया गया है। आक्सीजन सिलेंडर भी एंबुलेंस में रहते हैं। फिर भी कमी होती है तो पायलट व ईएमटी की जिम्मेदारी है कि वह स्टोर से सामान ले जाए। अपग्रेडेशन के लिए सिर्फ एक बार सर्वर बंद किया गया था।

    मनीष सचेती , डायरेक्टर, जेडएचएल

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    एंबुलेंस को संक्रमण मुक्त करने के लिए ईएमटी को बोला गया है। हो सकता है एक-दो एंबुलेंस में न हो रहा हो। इसके लिए उन्हें फिर से निर्देश जारी किए जाएंगे।

    डॉ. डीके गौड़, डिप्टी डायरेक्टर, एनएचएम

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    एंबुलेंस में मरीज ज्यादा देर तक नहीं रहता, इसलिए इंफेक्शन का उतना खतरा नहीं है। हां, फिनायल से अच्छी तरह से सफाई जरूरी है, क्योंकि खून बह रहे मरीजों को ले जाने के बाद ब्लड की सफाई अच्छे से न हो तो दूसरे मरीजों को संक्रमण हो सकता है।

    डॉ. दीपक दुबे, पूर्व एचओडी, माइक्रोबायोलॉजी, जीएमसी

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    मप्र में कुल एंबुलेंस-606

    भोपाल में-17

    कौन-कौन जिम्मेदार- जिकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड (जेडएचएल),क्योंकि बचाव के लिए दस्ताने और डिलीवरी किट तक नहीं देती। पहले संचालन करने वाली कंपनी जीवीके भी एंबुलेंस को संक्रमणमुक्त करने करने पर ध्यान नहीं देती थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलावा स्वास्थ्य मंत्री तक जिम्मेदार हैं।

    -किस तरह के मरीजों को एंबुलेंस में लाया जाता है

    टीवी, कैंसर, डिलीवरी कराने वाली महिलाओं व एक्सीडेंट केस आदि।

    -किस तरह के संक्रमण फैलने का खतरा रहता है

    स्वास्थ्य संक्रमण, त्वचा संबंधी। यदि एंबुलेंस में मौजूद कर्मचारी अच्छे से हाथ नहीं धोए तो कुछ खाने के दौरान शरीर के भीतर भी संक्रमण फैलने का खतरा है।

    -संकमण से कैसे बचा जा सकता है

    एंबुलेंस के फर्श को फिनाइल से साफ करके। फार्मेलीन का इस्तेमाल करके एंबुलेंस की ऊपरी बॉडी साफ करें। एंबुलेंस में दो डस्टबिन रखें जाएं। एक में मरीजों के इस्तमाल किए जाने वाले इंजेक्शन,ब्लेड,पिनें सहित अन्य उपकरण डाले जाएं और दूसरे में कॉटन, पट्टियां, दवाओं व इंजेक्शन के रैपर फेंके। कुछ समय बाद ही डस्टबिन से कचरा ऐसी जगह फेंका जाए, जिससे कोई सकंमण न फैले।

    और जानें :  # ambulance 108
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