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    गैस प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों में जन्मजात विकृतियां कई गुना ज्यादा

    Published: Wed, 02 Dec 2015 11:54 AM (IST) | Updated: Fri, 02 Dec 2016 10:04 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल (नप्र)। गैस पीड़ितों और प्रदूषित भूजल प्रभावित क्षेत्रों में जन्म ले रहे बच्चों में जन्मजात विकृतियां सामान्य जनसंख्या के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। यह तथ्य गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य के लिए काम करने वाली संस्था संभावना क्लीनिक के प्राथमिक सर्वे में सामने आया है।

    सर्वे के मुताबिक गैस पीड़ित व प्रदूषित जल पीड़ित बस्तियों में 2500 से ज्यादा ऐसे बच्चों की पहचान की है, जो जन्मजात विकृतियों से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा गैर गैस पीड़ितों के मुकाबले काफी अधिक है।

    20 हजार परिवारों का सर्वे

    संभावना क्लीनिक ने 20 हजार परिवारों के करीब 1 लाख से अधिक लोगों पर अध्ययन किया है। इसके फील्ड को-आर्डिनेटर रीतेश पाल के अनुसार शोध के आंकड़ों का विश्लेषण जारी है। प्राथमिक अवलोकन से यह सामने आया है कि सामान्य आबादी के मुकाबले जहरीली गैस या प्रदूषित भूजल से प्रभावित आबादी में जन्मजात विकृतियों की दर कहीं ज्यादा है।

    ज्यादातर बच्चे मंदबुद्धि

    पाल ने बताया कि जन्मजात विकृतियों वाले बच्चे मुख्यत: सेरेब्रल पाल्सी व सिन्डेक्टिली-पॉलिटेक्टिली से पीड़ित हैं। ज्यादातर बच्चे मंदबुद्धि हैं। इन बच्चों का उपचार भी किया जा रहा है। द्वारका नगर की शांति बाई के 12 वर्षीय बेटे अभिषेक का उपचार बीएमएचआरसी में किया गया है। न्यू आरिफ नगर की आएशा ने अपने 8 साल के बेटे अमन का उपचार हमीदिया अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए करवाया है।

    बजट की कमी: 850 की जगह 300 का उपचार

    गैस पीड़ित व दूषित पानी पीड़ित परिवारों के जन्मजात विकृति से पीड़ित बच्चों का उपचार चिंगारी ट्रस्ट में किया जाता है। लेकिन यहां संसाधन सीमित होने के कारण कई बच्चों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। चिंगारी ट्रस्ट संस्थान में इस समय 300 बच्चों को स्पीच थैरेपी, फिजियोथैरेपी व स्पेशल एजूकेशन दी जा रही है,जबकि 850 से अधिक बच्चे वेटिंग में हैं। चिंगारी ट्रस्ट की रशीदा बी बताती हैं कि हमारे पास जगह और बजट की कमी है। अगर हम सभी बच्चों को उपचार देंगे, तो स्पीच थैरेपिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट व एजुकेटर बढ़ाने पड़ेंगे, जिसके लिए बजट की जरूरत पड़ेगी।

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