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    शरारत के लिए 108 नंबर लगाने वालों से दूसरों की जिंदगी जोखिम में

    Published: Fri, 17 Feb 2017 03:00 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 08:22 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल, नवदुनिया न्यूज। शरारत के लिए 108 नंबर पर फोन लगाने वाले किसी की जिंदगी जोखिम में डाल रहे हैं। कई लोग दुर्घटना में घायलों और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने एंबुलेंस बुलाने 108 नंबर पर फोन करते हैं, लेकिन शरारती कॉल के फेर नंबर काफी देर तक व्यस्त मिलता है। उन्हें समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती। इस बीच कइयों की जिंदगी ही खत्म हो जाती है। 108 में आने वाले 50 फीसदी से ज्यादा कॉल इसी तरह के हैं।

    मंगलवार को एमपी नगर में एक मरीज के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। तबीयत खराब होने पर उसके साथियों ने लगातार 9 मिनट तक 108 पर फोन लगाया, लेकिन नंबर व्यस्त ही रहा। उसे ऑटो से अस्पताल पहुंचाया गया।

    6 बार लगाया फोन

    एमपी नगर स्थित एक निजी कंपनी में काम करने वाले संजीव द्विवेदी (44) को मंगलवार शाम चक्कर आ गया। 108 एंबुलेंस बुलाने 7:49 से 7:58 बजे तक मोबाइल नंबर 7987201385 से 6 बार 108 पर फोन लगाने की कोशिश की गई, लेकिन फोन नहीं लगा। जिसके चलते उन्हें ऑटो से एक निजी अस्पताल ले जाया गया। 9 मिनट तक यही जवाब मिला कि यह नंबर अभी व्यस्त है।

    कॉल लगते नहीं

    हेल्थ हेल्प लाइन में डॉक्टरों से अपनी बीमारी के बारे में सलाह लेने के लिए राम सिंह यादव ने मोबाइल नंबर 9425007262 से 108 नंबर पर मंगलवार शाम 7 बजे के करीब फोन लगाया। दो बार फोन नहीं लगा। करीब दो मिनट बाद उन्होंने दोबारा फोन किया। इसके बाद उनकी डॉक्टरों से बातचीत हुई। उन्हें महीने भर से सर्दी-जुकाम है। उन्होंने डॉक्टरों से बचाव के उपाय पूछे।

    दो महीने से शिकायत : 108 नंबर व्यस्त होने की शिकायतें पिछले दो महीने से खासी बढ़ गई हैं। पीड़ितों ने बताया कि एक बार में तो कभी फोन लगता ही नहीं है। बताया जा रहा है कि 108 पर काफी कॉल बढ़ गए हैं, लेकिन रिसीव करने वाली लाइन सिर्फ 90 हैं। इससे अधिक कॉल होने पर लाइन व्यस्त बताती है।

    हेल्थ हेल्पलाइन शुरू, एक दिन में 100 कॉल भी नहीं

    पूरे प्रदेश के लिए हेल्थ हेल्पलाइन सेवा सोमवार से शुरू हो गई है। 108 और 104 नंबर डॉयल करने पर डॉक्टरों से बीमारी के बारे में सलाह, काउंसलिंग, दवाओं की जानकारी, प्रेगनेंसी के दौरान रखी जानी वाली सावधानी की जानकारी ली जा सकती है। पहली बार फोन करने वाले का पूरा प्रोफाइल बनाया जाता है और फोन नंबर रजिस्टर्ड किया जाता है। प्रोफाइल बनाने में करीब 4 मिनट लग रहे हैं।

    पैरामेडिकल स्टाफ मरीज से पूरी जानकारी लेने को कॉल फारवर्ड कर देते हैं। यहां अभी हर दिन 100 कॉल भी नहीं है। डॉक्टर और पैरामेडिकल मिलाकर करीब 15 सीट वाला कॉल सेंटर हेल्थ हेल्पलाइन के लिए बनाया गया है।

    फर्जी कॉल्स की वजह से हो रही समस्या

    108 का संचालन करने वाली चिकित्सा हेल्थ केयर के डायरेक्टर मनीष सचेती ने बताया कि पहले 108 का 40 सीट का कॉल सेंटर था। बाद कॉल सेंटर 90 सीट वाला कर दिया गया है। बावजूद इसके समस्या खत्म नहीं हो रही। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब 6 हजार फर्जी काल आते हैं, जिस कारण लाइन व्यस्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि कॉल की सीटें बढ़ाने की बजाए फर्जी कॉल्स बंद करने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब 2500 कॉल ही जरूरतमंदों के होते हैं बाकि फर्जी होते हैं।

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