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    रात में हो गई थी मौत, सुबह फिर जिंदा हुए, लोगों में दहशत

    Published: Tue, 12 Sep 2017 02:49 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 10:08 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    संत हिरदाराम नगर, नवदुनिया प्रतिनिधि। बैरागढ़ के बुजुर्ग समाजसेवी काका मोटूमल वासवानी को मृत मानकर परिजन अंतिम संस्कार की तैयार कर रहे थे। इसी बीच उनकी सांसें लौटने का आश्चर्यजनक मामला सामने आया है। अस्पताल से घर ले जाते समय ही काका ने बेटे से पूछा मुझे कहां ले जा रहे हो। घर पहुंचते ही काका फिर बेहोश हो गए, लेकिन उनकी सांसें चल रहीं थीं। परिजनों ने शवयात्रा निरस्त कर उन्हें एलबीएस अस्पताल में भर्ती कराया है।

    76 वर्षीय काका वासवानी पूज्य सिंधी पंचायत के संस्थापक सहित करीब 200 संस्थाओं के मुख्य सलाहकार एवं संरक्षक हैं। 6 सितंबर को उन्हें माइनर अटैक आया था। परिजनों ने उन्हें चिरायु अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल में उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए वेंटीलेटर पर रखा गया था। बताया जाता है कि परिजन उन्हें वेंटीलेटर से हटाने की मांग कर रहे थे।

    डॉक्टरों ने परिजनों से कहा कि आप उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती करा सकते हैं। देर रात को श्री वासवानी की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों से कहा कि आप उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर सकते हैं। परिजनों ने समझा कि उनकी मौत हो गई है। इसी गफलत में सुबह ही अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई। एक पुत्र ने तो मुंडन भी करा लिया। रिश्तेदारों को भी सूचना दे दी गई।

    एंबुलेंस में पूछा कहां ले जा रहे हो

    मंगलवार सुबह करीब 10 बजे परिजन श्री वासवानी को एंबुलेंस से जी-9 स्थित अपने घर ला रहे थे। रास्ते में ही श्री वासवानी के शरीर में हलचल दिखी। उन्होंने पूछा भी कि हरि ओम मुझे कहां ले जा रहे हो। घर तक आते-आते श्री वासवानी फिर बेहोश हो गए, लेकिन उनकी सांस चल रही थी। घर पर ही जांच के बाद डॉ.एसडी बालानी ने उन्हें किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। फिलहाल उन्हें एलबीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां भी उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है।

    लापरवाही है या फिर गफलत

    पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव माधु चांदवानी ने पूरे घटनाक्रम के लिए चिरायु अस्पताल प्रशासन को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल की लापरवाही है। श्री वासवानी के पुत्र सुरेश वासवानी के अनुसार डॉक्टरों ने कहा आप इन्हें ले जाएं हमने समझा मौत हो गई है। हालांकि अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट जारी नहीं किया। पूरे घटनाक्रम को लेकर बैरागढ़ में दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। बैंक आफ बड़ौदा के पास श्री वासवानी के निवास पर दिनभर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। पंचायत ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

    परिजन नहीं चाहते थे इलाज हो

    अटैक आने पर हमने श्री वासवानी को आईसीयू में भर्ती किया था। हमने परिजनों को अनुमानित खर्च बताया था, लेकिन परिजन इलाज के लिए सहमत नहीं हुए। जान बचाने के लिए हमने उन्हें वेंटीलेटर पर रखा था। परिजन सीएम हाउस से खर्च स्वीकृत होने का इंतजार कर रहे थे। परिवार की सहमति से ही वेंटीलेटर से हटाया गया। अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित नहीं किया था। - डॉ. पीके भट्टाचार्य, डायरेक्टर चिरायु अस्पताल

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