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    सारंगी पर सजा राग 'सरस्वती'

    Published: Thu, 14 Aug 2014 08:57 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Aug 2014 08:57 AM (IST)
    By: Editorial Team

    भोपाल। कला रसिकों के लिए बुधवार की शाम संगीत का दुर्लभ आनंद लेकर आई। इस अवसर पर कलाकारों ने मौसिकी में संगीत के रस की ऐसी मिठास घोली कि इसके आनंद का अनुभव श्रोताओं को लंबे समय तक याद रहेगा। भारत भवन में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी की ओर से पद्मश्री उस्ताद अब्दुल लतीफ खां स्मृति समारोह 'दुर्लभ वाद्य प्रसंग' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आए पंडित डालचंद शर्मा को उस्ताद लतीफ खां सम्मान 2014-15 से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संस्कृति संचालक रेणु तिवारी, अकादमी के निदेशक अनिल कुमार, बशीरन बी सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने किया।

    'सारंगी वृंद' ने बांधा समां

    संगीत प्रस्तुतियों की शुरुआत फारूक लतीफ खां एवं सहयोगी कलाकारों के सारंगी वादन से हुई। राग सरस्वती में सारंगी की सुमधुर ध्वनियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने दो बंदिशें पेश की, जिसमें पहली बंदिश मध्यलय तीन ताल में निबद्घ थी। वहीं दूसरी प्रस्तुति दु्रत लय एक ताल में निबद्घ थी। 45 मिनिट की इस प्रस्तुति में श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। इस दौरान मंयक राठौर, अमान हुसैन, अनीफ हुसैन अैार जावेद खां ने सारंगी पर संगत दी। वहीं, तबले पर अशगर अहमद, शहनावाज हुसैन और आमीर खान ने संगत देकर समां बांधा।

    ... और बरस पड़ी बूंदे

    कार्यक्रम के दौरान अगली प्रस्तुति दिल्ली के पखावज वादक पंडित डालचंद शर्मा की रही। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरूआत 'शिव परन' के साथ की। उन्होंने इस प्रस्तुति में महाकाल की आराधना की। अगली प्रस्तुति के रूप में उन्होंने 'झाला' पेश किया, जिसमें यह वादन के माध्यम से बताया कि बारिश की बूंदे किस प्रकार पृथ्वी पर गिरती हैं। वहीं उन्होंने कुछ 'परनों' के माध्यम से बिजली चमकने और बादल गरजने की ध्वनि को प्रस्तुत किया। इसके बाद कुछ 'खानदानी परनों' की प्रस्तुति से समां बांधा। साथ ही नागद्वारा लय-ताल और तोड़ने का कांटा की प्रस्तुति दी। 'रेला' और 'छूट की परन' से उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन किया। इस प्रस्तुति में उन्होंने बच्चे के 'छूट' जाने की व्यथा सुनाई। प्रस्तुति में उनके साथ पखावज पर उनके शिष्य हरीशचंद्र पति ने संगत दी। वहीं, सारंगी पर फारूक लतीफ ने लहरा दिया।

    समारोह में आज

    दुर्लभ वाद्य प्रसंग की अंतिम प्रस्तुति में गुरुवार को इंदौर की रागिनी त्रिवेदी विचित्र वीणा, मुरादाबाद के मुराद अली सारंगी और मुंबई के उल्हास बापट संतूर वादन करेंगे। कार्यक्रम शाम 7 बजे शुरू होगा।

    और जानें :  # durlabh vadya prasang in bharat bhawan
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