Naidunia
    Monday, February 27, 2017
    PreviousNext

    बिजली की मैदानी हकीकत ने सरकार के उड़ाए होश

    Published: Thu, 29 Oct 2015 01:21 PM (IST) | Updated: Thu, 29 Oct 2015 01:22 PM (IST)
    By: Editorial Team

    भोपाल (ब्यूरो)। प्रदेश में तीन दिन का मैदानी दौरा कर लौटे मुख्यमंत्री, मंत्री और अफसरों को हर जगह किसानों ने सबसे ज्यादा समस्या बिजली से बताई। कहीं किसानों ने बिजली न आने की बात कही तो कहीं ट्रांसफारमर खराब होने पर लंबी कटौती की शिकायत रखी। इतना ही नहीं बिजली भले ही नहीं आए, लेकिन लंबे चौड़े बिल आने की बात भी किसानों ने मुख्यमंत्री सहित अफसरों के सामने खुलकर रखी। यह बात बुधवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री द्वारा ली गई बैठक में अफसर और मंत्रियों ने बताई।

    मुख्यमंत्री ने भी माना कि प्रदेश में बिजली की बड़ी समस्या है। उन्होंने पूछा कि बिजली विभाग से कौन है, इस पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव खड़े हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम बजट का एक बड़ा हिस्सा किसानों को सिर्फ बिजली देने पर खर्च कर रहे हैं तो फिर ये परेशानी क्यों। श्रीवास्तव इसका जवाब नहीं दे सके। उन्हांेने बताया कि ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आईपीसी केशरी बाहर ट्रेनिंग पर गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा ठीक है यह विषय वैसे भी काफी बड़ा है, इस पर अलग से चर्चा करेंगे।

    देख ली मैदानी परेशानी, अब समाधान बताएं

    मुख्यमंत्री ने आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों से कहा कि आपने खेतों में जाकर किसानों की समस्या देख ली है। आपको समझ में आ गया होगा कि मैदान में गवर्नेंस के क्या हाल हैं। अब तक आप लोग एसी कमरों में बैठक रोजी पिक्चर (अच्छा-अच्छा) देखते थे, लेकिन अब हकीकत ख्ाुद देखकर आए हैं। आप सब लोग अपने टैलेंट (प्रतिभा) का उपयोग कर इस समस्या से निपटने का समाध्ाान बताएं। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि सूखे की स्थिति से निपटने और खेती को बेहतर बनाने के लिए मध्यप्रदेश देश में उदाहरण प्रस्तुत करे।

    कल मैं करूंगा वन-टू-वन चर्चा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आपने मैदान में क्या देखा और क्या समझा, इस पर एक संक्षिप्त नोट तैयार कर लीजिए। मैं आप सबसे गुरुवार को 4-4 मिनट के लिए वन-टू-वन चर्चा करूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि दौरे पर गए अफसरों का संभागवार या क्षेत्रवार 5 समूह बना दिए जाएं, जिससे यह लोग उस क्षेत्र की समस्या को दूर करने के लिए अपना प्रजेंटेशन तैयार कर सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी अफसर 30 अक्टूबर को प्रशासन अकादमी में बैठकर अपना प्रजेंटेशन तैयार कर सकते हैं। इसके लिए हर ग्रुप में वरिष्ठ अफसरों को संयोजक बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा इस मंथन में सभी संभागायुक्तों को भी बुलाया जाए। वह भी मैदानी परेशानियों को अच्छे से बता सकते हैं।

    थोड़ी सावधानी रखते तो ओर बेहतर संदेश जाता

    मुख्यमंत्री ने प्रभारी मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के गांव-गांव में किए गए दौरे की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा संदेश गया है। उन्होंने कुछ मंत्री और अफसरों का नाम लिए बगैर कहा कि यदि थोड़ी सावध्ाानी बरती जाती तो प्रदेश में इसका और बेहतर संदेश जाता। उन्होंने कहा कि मप्र देश का पहला राज्य है जहां पर मुख्यमंत्री, मंत्री और प्रदेश के आला अफसर किसानों का दर्द जानने उनके खेतों में गए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

    आईपीएस अनुराधा शंकर की तारीफ

    मुख्यमंत्री ने बैठक में आईपीएस अनुराधा शंकर के दौरे की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अनुराधा ने गांव के पंचायत भवन में रात गुजारकर वहां की महिलाओं के साथ बातचीत कर अच्छा संदेश दिया है। इसका फीड बैक भी अच्छा आया है।

    यह भी आए सुझाव

    - मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में तहसीलदार-नायाब तहसीलदार की कमी है। इनके पद बढ़ाए जाना चाहिए।

    - अपर मुख्य सचिव अरूणा शर्मा ने कहा कि कृषि विस्तार अधिकारी का पद में बदलाव किया जाए। यह किसानों से समन्वय बनाने में सक्रिय नहीं है।

    - एक आईपीएस अफसर ने कहा कि मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई जाए। हरियाणा को ज्यादा मजदूरी मिल सकती है तो मप्र को क्यों नहीं।

    - एक आईएफएस अफसर ने कहा कि मैदान में उद्यानिकी अमला काफी कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

    - उपलब्ध जल के बेहतर प्रबंधन के साथ कम पानी में होने वाली फसलों की कार्ययोजना बनाई जाए।

    - जहां बिल्कुल पानी उपलब्ध नहीं वहां के लिए आपातकालीन योजना बनाना होगी। गांव में पेयजल के व्यापक प्रबंध भी करना होंगे।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      अटपटी-चटपटी