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    यू ट्यूब पर वीडियो देख उगाया प्रोटीन वाला चारा, बढ़ गया दूध उत्पादन

    Published: Tue, 12 Sep 2017 01:44 PM (IST) | Updated: Tue, 12 Sep 2017 05:27 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    महेश पाटीदार, भोपाल। होशंगाबाद रोड स्थित दीपड़ी गांव में डेयरी चलाने वाले अशोक पाटीदार तकनीक के जरिए महज एक हजार वर्गफीट जगह में 100 पशुओं के लिए प्रोटीन और मिनरल्स से युक्त हरा चारा उगा रहे हैं। पहले इतना चारा उगाने में उन्हें 15 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती थी और खर्च भी अधिक लगता था। इस तकनीक का नाम है हाईड्रोफोनिक ग्रास ट्रे।

    उन्हें यह आइडिया यू-ट्यब पर वीडियो देखकर आया था। उन्होंने नई तकनीक से हरा चारा उगाना शुरू किया और उन्हें इसमें सफलता मिली। हरे चारे के उपयोग से उनकी डेयरी में दूध का उत्पादन बढ़ा और पहले के मुकाबले खर्च भी कम हो गया। अशोक अपनी सफलता से काफी खुश हैं और अन्य लोगों को भी इस तकनीक का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं।

    क्या है हाईड्रोफोनिक ग्रास ट्रे तकनीक और किस तरह करती है काम

    इस तकनीक में बिना मिट्टी के हरे चारे का उत्पादन किया जाता है। 8 बाई 2 फीट की 6 लेयर की एक ट्रे बनाई जाती है, जिसमें मक्के के दानों को एक दिन पहले भिगाकर जूट के तिरपाल से ढंक दिया जाता है, जिससे वे अंकुरित हो जाते हैं। दूसरे दिन इन अंकुरित दानों को ट्रे में रखा जाता है। एक ट्रे में ऐसा 10 दिनों तक किया जाता है, क्योंकि इस तकनीक के माध्यम से हरा चारा 10 वें दिन पशुओं को खिलाने लायक हो जाता है। प्रतिदिन एक ट्रे से चारा निकाला जाए तो 10 वें दिन फिर से पहली वाली ट्रे में हरा चारा तैयार हो जाता है।

    जबकि परंपरागत तरीके से उगाया गया हरा चारा 45 दिन बाद पशुओं को खिलाने के लायक तैयार हो पाता है। जबकि तकनीक से उगाया गया चारा अंकुरित होने के कारण प्रोटीन और मिनरल्स से युक्त होता है। इससे दूध में फैट की मात्रा भी बढ़ जाती है। दूध देने वाले पशुओं को अतिरिक्त प्रोटीन व मिनरल्स की जरूरत होती है। जिसकी पूर्ति के लिए बाजार से खरीद कर तरल प्रोटीन दिया जाता है, जो मंहगा होता है।

    प्रति पशु बचे 40 रुपए

    मैंने यह तकनीक यू-ट्यूब पर देखी थी। शुरू में तो एक रैक में चारा उगाया। अब एक हजार वर्गफीट में 100 जानवरों का चारा तैयार कर रहा हूं। पहले एक दुधारू जानवर को दोनों समय का मिलाकर 8 किलो पशुआहार देना पड़ता था, जिसके लिए बाजार से 20 रुपए प्रति किलो पशु आहार के लिए खर्च करने पड़ते थे। अब सिर्फ 6 किलो हरा चारा दे रहे हैं। जिससे प्रति पशु 40 रुपए की बचत हो रही है।

    मिट्टी जनित चारे के मुकाबले अंकुरित चारा हर दृष्टि से बेहतर है। इसमें विटामिन ए समेत प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे दूध का उत्पादन तो बढ़ेगा ही साथ में उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होगी। - डॉ. एसआर नागर, सीनियर वेटनरी सर्जन,राज्य पशु चिकित्सालय

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