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    FIR हो गई तो क्या हुआ, जांच का इंतजार करिए, आप कतार में हैं

    Published: Thu, 14 Sep 2017 12:00 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Sep 2017 07:51 AM (IST)
    By: Editorial Team
    police demo 14 09 2017

    रवीन्द्र कैलासिया, भोपाल। मप्र पुलिस की आवाम एफआईआर दर्ज होने के बाद इस भरोसे में न रहें कि उनके प्रकरण की विवेचना तुरत-फुरत शुरू हो जाएगी। इसके लिए अपने नंबर का इंतजार करना होगा, क्योंकि मध्यप्रदेश पुलिस के पास विवेचना के लिए करीब एक चौथाई पुलिसकर्मियों का टोटा है। वजह यह है कि पदोन्न्ति से भरे जाने वाले हवलदार, एएसआई, टीआई, डीएसपी और एएसपी के पद रिक्त हैं। जिला पुलिस बल, सीआईडी, महिला अपराध और एससी-एसटी संबंधी अपराधों के विवेचकों के लिए अब टकराव के हालात बनने लगे हैं।

    प्रदेश में हर साल लगभग ढाई लाख से अधिक अपराध दर्ज होते हैं, जिनमें से अनुसूचित जाति-जनजाति के मामलों की संख्या करीब 7000 हजार है। थानों में अपराधों की विवेचना मुख्य रूप से हवलदार व एएसआई के जिम्मे होती है तो एससी-एसटी व महिला अपराधों की विवेचना डीएसपी या एडिशनल एसपी स्तर के अफसरों को करना होती है। विशेषज्ञों के अनुसार जिला पुलिस बल के थानों में हवलदार और एएसआई करीब 90 फीसदी अपराध की विवेचना करते हैं। मगर इनकी ही संख्या दिन-ब-दिन कम होती जा रही है और सिपाहियों का प्रमोशन नहीं हो रहा।

    छह हजार हवलदार-एएसआई की कमी

    प्रदेश पुलिस में 3080 हवलदारों तो लगभग 2880 एएसआई की कमी हैं। इन पदों पर सीधी भर्ती नहीं होती तो यह संख्या हर महीने बढ़ रही है, क्योंकि रिटायरमेंट भी लगातार हो रहे हैं। इसी तरह प्रदेश में स्वीकृत 1648 टीआई के पदों में से करीब सवा पांच सौ की कमी है। टीआई भी सीधी भर्ती का पद नहीं होता है। सीधी भर्ती के सिपाही, एसआई और डीएसपी के पदों पर भर्ती होती भी है, लेकिन सिपाही के प्रमोशन नहीं होने से वह हवलदार नहीं बन पा रहे। एसआई और डीएसपी को प्रशिक्षु रहने तक इनवेस्टीगेशन की पूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।

    पीएचक्यू की प्रशासन शाखा पर दबाव

    इनवेस्टीगेशन के लिए जिला पुलिस बल, सीआईडी, महिला अपराध शाखा और अजाक शाखा के बीच अधिकारियों के बंटवारे को लेकर पीएचक्यू की प्रशासन शाखा पर दबाव है। कोई भी शाखा अधिकारियों को छोड़ने को तैयार नहीं है। अजाक शाखा डीएसपी से विवेचना कराने की बाध्यता में राहत लेने निरीक्षकों को ये अधिकार देने की कोशिश कर रही है।

    प्रमोशन नहीं होने से समस्या

    अदालत में प्रमोशन को लेकर चल रहे मामले से समस्या खड़ी हो गई है। मौजूदा बल में से लोग रिटायर भी हो रहे हैं। - अनुराधा शंकर, एडीजी, प्रशासन

    निरीक्षकों को विवेचना के अधिकार देंगे

    एससी-एसटी पर होने वाले अपराधों की विवेचना में दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि डीएसपी को ही अधिकार हैं। इसे ऐसे अपराधों की विवेचना के अधिकार निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। - एसएल थाउसन, एडीजी, अजाक कल्याण

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