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    भोपाल में 3 इंजीनियरिंग छात्रों समेत 5 डूबे, 4 की मौत, एक लापता

    Published: Mon, 19 Jun 2017 10:36 PM (IST) | Updated: Mon, 19 Jun 2017 10:41 PM (IST)
    By: Editorial Team
    dam 19 06 2017

    भोपाल। भोपाल में रविवार और सोमवार को 24 घंटे के अंदर डेम और तालाब में पांच लोग डूब गए। इनमें से रविवार को कोलार में 10 साल के किशोर और तैलया में 18 साल के युवक की डूबने से मौत हो गई और बिलखिरिया के घोड़पछाड़ डेम में तीन इंजीनियरिंग छात्र डूब गए। इनमें से दो के शव मिल गए हैं, जबकि एक का शव देर रात तक एसडीईआरएफ की टीम भी नहीं खोज पाई थी। तीन एलएनसिटी कॉलेज के फर्स्ट ईयर के छात्र हैं। देर रात तक स्टेट डिजास्टर इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स (एसडीईआरएफ) की टीम तलाशी अभियान में जुटी हुई थी।

    एलएनसिटी कॉलेज के फर्स्ट ईयर के छात्र मूलत: पटना निवासी मृत्युंजय कुमार सोमवार दोपहर करीब साढ़े 11 बजे पेपर देने के बाद अपने दोस्तों अभय राज, चिराग कुमार, पारस नायक, उज्जवल, सोनू कुमार, पियुष रंजन और अंकित शर्मा के साथ ग्राम झिरिया, बिलखिरिया स्थित घोड़ा पछाड़ डेम पहुंचा।

    वे यहां कोलार स्थित कॉलेज के ही हॉस्टल में रहते हैं। वे फर्स्ट ईयर के सेकंड सेम का पेपर खत्म होने की खुशी में आए थे। अभय पानी के बाहर बैठ गया, जबकि शेष सातों छात्र पानी में उतर गए। काफी देर मस्ती करने के बाद सोनू और पियुष को छोड़ सभी छात्र किनारे पर आकर कपड़े पहनने लगे। इसी दौरान सोनू और पियुष की चीख सुनकर अंकित पानी में कूद गया। उसके पीछे मृत्युंजय और पारस भी पानी में उतरन गए।

    इसी दौरान मुत्युंजय को पानी में डूबता देख पारस उसे बचाकर बाहर ले आया, लेकिन अंकित दोस्तों को बचाने के प्रयास में पानी में डूब गया। बच्चों की चीख सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। कुछ युवकों ने पानी में छलांग लगाकर सोनू और पारस के शव तो बाहर निकाल लिए, लेकिन अंकित का पता नहीं चल सका। यहां नगर निगम के गोताखोर करीब तीन घंटे तक अंकित की नाकाम तलाश करते रहे। शाम करीब पौने 6 बजे एसडीईआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। देर रात तक अंकित का पता नहीं चल पाया था।

    जो बचाने गया वहीं नहीं मिला

    अंकित तो अपने दोस्तों को बचाने के प्रयास में पानी में डूब गया। जब वह कपड़े पहन रहा था तभी सोनू और पियुष की चीख सुनकर वह वैसे ही दौड़ते हुए पानी में कूद गया। हैरानी की बात तो यह है कि अंकित के अलावा सोनू और पियुष को भी तैरना आता था, लेकिन वह तीनों ही डूब गए। डूबने वाली जगह को करीब 15 से 20 फीट गहरी खाई बताया जाता है।

    परिजनों को दे दी सूचना

    घटना के बाद पुलिस ने डेम में डूबने वाले सभी छात्रों के परिजनों को घटना की सूचना दे दी थी। परिजन भी सूचना मिलते ही वहां से रवाना हो गए थे, हालांकि पुलिस ने परिजनों को सिर्फ इतना बताया कि उनके बच्चे हादसे का शिकार हो गए हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।

    हम चीख रहे थे, और वे डूब रहे थे

    'हम बाहर कपड़े बदलने लगे। मैंने सोनू और पियुष से कहा- बाहर आ जाओ। बस बहुत हुआ, लेकिन वह मिट्टी छुटाने का कहकर दोबारा नहाने लगे। हम हॉस्टल जाने की तैयार में थे। तभी सोनू चीखा। हमें बचाओ। हम डूब रहे हैं। मैं अंकित और मृत्युंजय पानी में कूद गए। लेकिन मुझे और मृत्युंजय को तैरना नहीं आता था। मृत्युंजय भी डूबने लगा। अंकित ने कहा तुम दोनों बाहर जाओ मैं इन्हें बचाता हूं। मैं उसे बचाकर बाहर खींच लाया। किनारे पर आने के बाद पलटकर देखा तो तीनों पानी के अंदर समा चुके थे। हम चीख रहे थे। कोई तो उन्हें बचाओ, लेकिन हमारी मदद के लिए कोई नहीं था। हमने डायल-100 को कॉल लगाने का प्रयास किया, लेकिन नेटवर्क नहीं था। गिरते-पड़ते डेम के ऊपर पहुंचने पर नेटवर्क आया, तब पुलिस को फोन कर पाए। हम चीख रहे थे और वे हमारे सामने डूब गए। अगर मुझे तैरना आता तो मैं भी दोस्तों को बचाने का प्रयास कर सकता। काश हम यहां आए ही नहीं होते।

    जैसा परास नायक ने नवदुनिया को बताया।

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