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    लहूलुहान योगिता सड़क पर पड़ी रही, बस का ड्राइवर भाग गया

    Published: Wed, 28 Jun 2017 04:08 AM (IST) | Updated: Thu, 29 Jun 2017 08:55 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल। दिन-मंगलवार, समय- दोपहर 1.35 बजे, स्थान- सत्य सांई कॉलेज के सामने (अन्ना नगर और साकेत नगर को जोड़ने वाली वो सड़क जो दिन में काफी व्यस्त रहती है)

    सड़क के किनारे-किनारे एक्टिवा से सामान्य गति से जा रही दो कॉलेज छात्राओं को दाएं ओर से पीछे से ओवरटेक करते हुए कार्मल कॉन्वेंट स्कूल की तेज रफ्तार बस के ड्राइवर ने टक्कर मार दी। एक्टिवा के साइड ग्लास से घिसटती हुई बस आगे निकल गई।

    एक्टिवा चला रही योगिता सिर के बल सड़क पर गिरी और सिर से खून की धार लग गई। योगिता तड़पती रही। सौ मीटर दूरी पर जाकर बस के पहिए थम गए। ड्राइवर बस से कूद कर भाग खड़ा हुआ। योगिता के साथ बैठी दूसरी छात्रा सड़क से गुजर रहे लोगों को मदद के लिए रोकती रही, लेकिन कोई नहीं रुका। तमाशबीनों की भीड़ है पर कोई मदद को आगे आने तैयार नहीं है।

    1.40 बजे- गोविंदपुरा थाने की डॉयल 100- फर्स्ट पहुंचती है। तैनात आरक्षक अखिलेश शर्मा उतरते ही योगिता के पास पहुंचते हैं पर तब तक उसके शरीर में हलचल शांत हो चुकी थी। वे बस के करीब पहुंचते हैं। बस में सवार सहमे बच्चों को शांत कर उनसे स्कूल का नंबर पूछते हैं और अपने मोबाइल से स्कूल फोन लगाते हैं पर कोई नंबर पर घंटी भी नहीं बजती। फिर बस के पीछे दर्ज नंबर पर फोन करते हैं। यह नंबर बस सर्विस वाले का निकलता है, उसे सूचित करते हैं कि आपकी बस ने एक छात्रा को टक्कर मार दी है। बस का ड्राइवर चाबी लेकर भाग गया है। बच्चे बस में अकेले हैं। इस सूचना के बाद भी कोई नहीं आया। (डॉयल 100 को जवाहर के मोड़ पर राहगीर ने एक्सिडेंट की सूचना दी थी।)

    1.45 बजे- कस्तूरबा अस्पताल की एंबूलेंस अचानक पहुंचती है। एंबूलेंस से अनिल नाम का शख्स उतरता है। लहूलुहान योगिता को उठाने के लिए गुजरते लोगों से मदद के लिए कहता है लेकिन कोई नहीं रुकता। आखिरकार अपने साथी के साथ मिलकर ही वो ही बगैर समय गंवाए योगिता को एंबुलेंस में लिटाता है और तेज गति से वापस कस्तूरब अस्पताल के लिए रवाना हो जाता है। एंबूलेंस के जाते ही योगिता की साथी छात्रा भी ओझल हो जाती है। (अनिल को अस्पताल में पहुंचे किसी युवक ने एक्सीडेंट की सूचना दी थी।)

    1.50 बजे- बस में सवार बच्चों का घबराहट के कारण बुरा हाल है। वे लगातार स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ अपनी टीचर्स को और अपने माता-पिता को फोन कर रहे हैं। स्कूल में तो कोई फोन लग नही रहा, टीचर्स जल्द ही आने का कह रही हैं और कुछ पेरेंटस आना शुरू भी हो गए हैं। जो पेरेंटस अब तक पहुंचे उनका आते ही बच्चों से सबसे पहला सवाल था कि ड्राइवर कहां गया। स्कूल में भी कोई फोन नहीं उठा रहा। बच्चों को किसके भरोसे सड़क पर छोड़कर भाग गया।

    2.00 बजे- अब तमाशबीन भी जा चुके हैं। मौके पर बच्चों के माता-पिता लगातार पहुंच रहे हैं और अपने बच्चों को साथ ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। पुलिस को अभी भी बस यह इंतजार है कि स्कूल या बस सर्विस का कोई तो जिम्मेदार व्यक्ति आए ताकि बस को थाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    2.10 बजे- स्कूल की एक टीचर पहुंची। नाम पूछने पर उन्होंने खुद कुछ कहने से इंकार तो किया ही और बच्चों से भी कुछ बोलने के लिए सबसे पहले मना किया। घटना के बारे में वे बच्चों से जानकारी लेने के साथ ही स्कूल प्रबंधन से भी लगातार संपर्क में थी।

    2.15 बजे- स्कूल की दूसरी बस आई। साथ ही दो टीचर और आईं। बच्चों से कहा जिनके पेरेंटस आ रहे हैं वे रुक जाएं और बाकी बच्चे दूसरी बस में बैठ जाएं, लेकिन तब तक 50 में से कोई 15-20 बच्चे ही बचे थे। उन्होंने भी अपने माता-पिता को बुला लिया था। लिहाजा दूसरी बस खाली लौट गई। इधर स्कूल प्रबंधन ने बस की चाबी भी भिजवा दी और पुलिस ने अपने ड्राइवर से बस को थाने में खड़ा करवा दिया।

    व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल

    1- बस में नहीं था स्कूल स्टॉफ

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक स्कूल बसों में संस्थान के एक सदस्य का अटेंडेंट के तौर पर होना जरूरी है। छात्रों की बस में विशेष तौर से महिला स्टॉफ होना चाहिए। इस आदेश के परिपालन में परिवहन विभाग पिछले सत्र के अंत में प्रदेश के सभी स्कूलों को आदेश भी जारी किए थे। इसके बाद भी राजधानी के प्रतिष्ठित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल की इस बस में स्कूल का कोई स्टॉफ मौजूद नहीं था।

    2- स्कूल का फोन क्यों बंद हो गया

    स्कूल बसों पर इमरजेंसी नंबर दर्ज होने के आदेश के बाद भी बस पर स्कूल का कोई नंबर नहीं था। बच्चों के पास स्कूल का जो नंबर था उस पर बच्चों के साथ-साथ डायल 100 के आरक्षक अखिलेश शर्मा भी कॉल कर रहे थे लेकिन फोन लगातार बंद आ रहा था। घटना के बाद स्कूल का अचानक फोन क्यों बंद हो गया, यह बड़ा सवाल खड़ा हुआ।

    3- बस पर ड्राइवर की कोई जानकारी नहीं

    परिवहन विभाग के आदेश हैं कि स्कूल बसों पर उसके ड्राइवर का नाम, उसका मोबाइल नंबर समेत समुचित जानकारी दर्ज होना चाहिए, लेकिन इस बस पर ड्राइवर की कोई जानकारी नहीं थी। बस संचालक का नंबर था, लेकिन उसने भी कोई मदद मुहैया नहीं करवाई।

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