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    चित्रकूट में हार की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं

    Published: Tue, 14 Nov 2017 09:10 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 07:20 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नईदुनिया स्टेट ब्यूरो, भोपाल । भाजपा में जीत का श्रेय लेने के लिए तो होड़ मची रहती है, लेकिन अटेर के बाद चित्रकूट में मिली पराजय की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। पार्टी के नेता हार के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। पार्टी में सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को क्या जवाब देंगे, जिन्होंने प्रदेश में अबकि बार दो सौ पार का टारगेट दिया है। साथ ही कांग्रेस की परम्परागत सीट छिंदवाड़ा-गुना और झाबुआ को जीतने के सपने का क्या होगा।

    कैसे जीतेंगे 200 सीट

    सूत्रों के मुताबिक चित्रकूट की हार ने भाजपा नेताओं के हौसले पस्त कर दिए हैं। खास बात यह है कि पार्टी पराजय के कारणों तक नहीं पहुंच पा रही है और न ही हार की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार है। ऐसे हालात में सबसे ज्यादा डर अमित शाह के टारगेट को लेकर हैं।

    शाह ने 200 से ज्यादा विधानसभा सीट और सभी लोकसभा सीट जीतने का लक्ष्य प्रदेश भाजपा को दिया है। ऐसे हालात में पार्टी के नेता एंटीइनकमबेंसी को लेकर चिंतित हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्र कहते हैं कि मंदसौर की घटना को पांच महीने बीत चुके हैं, फिर भी किसानों का भरोसा सरकार और पार्टी जीत नहीं पाई है। हालात ऐसे ही रहे तो 2018 के चुनाव में किसानों के वोट भाजपा को कैसे मिलेंगे।

    इसके अलावा सरकार की ज्यादातर घोषणाओं पर भी जनता का भरोसा नहीं बन पा रहा है। पदोन्नति में आरक्षण से सारा सवर्ण वर्ग नाराज है। आदिवासी वर्ग भी तमाम कोशिशों के बाद खुश नहीं है। इसके परिणाम झाबुआ लोकसभा चुनाव में दिख चुके हैं। शहडोल लोकसभा चुनाव में भी गौंडवाना पार्टी की बदौलत भाजपा के ज्ञानसिंह चुनाव जीते थे, वरना पार्टी हार जाती।

    शिवराज का जादू

    पार्टी में ही एक वर्ग की मानें तो भाजपा इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि चित्रकूट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जादू चल क्यों नहीं चल पाया। पार्टी को उम्मीद भी थी कि टिकट किसी को भी दिया जाए, सीएम चुनाव जितवा लेंगे। यही वजह है कि सीएम ने भी विदेश प्रवास पर जाने से पहले संगठन नेताओं को कह गए थे कि वे जिसे चाहे उसे टिकट दे दें। लौटकर वे सब संभाल लेंगे।

    पार्टी सूत्रों का कहना है कि चित्रकूट में प्रशासनिक लापरवाही भी हार की एक वजह है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि एक गांव में पानी की टंकी बनकर तैयार है। घर-घर तक नल कनेक्शन भी पहुच चुके थे, लेकिन पानी की सप्लाई एक मामूली टेंडर के कारण अटकी थी। इस बात से ग्रामीण खफा थे। उन्होंने मंत्रियों से भी इस बात की शिकायत की पर परिणाम कुछ नहीं निकला।

    समीक्षा करेंगे

    चित्रकूट उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा अभी नहीं हुई है। जल्द ही सभी नेताओं के साथ बैठकर विधिवत समीक्षा करेंगे।

    - नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

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