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    भोपाल गैस त्रासदी : 7700 करोड़ मुआवजे पर पांच साल में एक भी सुनवाई नहीं

    Published: Thu, 03 Dec 2015 08:08 AM (IST) | Updated: Thu, 03 Dec 2015 10:37 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल (नप्र)। गैस कांड को तीन दशक बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ितों को उचित मुआवजा और आरोपियों को सजा का आज भी इंतजार है। 7 हजार 700 करोड़ रुपए के मुआवजे की याचिका सुप्रीम कोर्ट में पांच साल से लंबित है। गैस कांड की जिम्मेदार कम्पनी यूका के भारतीय अधिकारियों को सजा दिलाने का मामला भी राजधानी के सेशन कोर्ट में पांच साल से चल रहा है।

    राज्य सरकार ने फास्ट ट्रेक कोर्ट बनाकर मामले की सुनवाई का आश्वासन गैस संगठनों को दिया था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इन आरोपियों को वर्ष 2010 में सीजेएम कोर्ट ने 2-2 साल की सजा सुनाई थी, जिसकी अपील सेशन कोर्ट में की गई है।

    वर्ष 2010 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन ने पांच गुना मुआवजा और केन्द्र सरकार ने सुधारात्मक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाकर गैस पीड़ितों के लिए यूका की वर्तमान मालिक डॉव केमिकल्स से 7 हजार 700 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की है।

    पांच साल से यह मामला सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में लंबित है। इस पर एक भी सुनवाई नहीं हुई है। मामले में राज्य सरकार ने भी केंद्र पर सुप्रीम से जल्द सुनवाई का आग्रह करने को लेकर कभी दबाव नहीं बनाया।

    संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार कहते हैं कि राज्य सरकार चाहे तो स्वयं भी इंटरवीनर बन सकती है। वह सुप्रीम कोर्ट में मामले में सुनवाई के लिए आवेदन भी दे सकती है। इधर गैस कांड के कारणों, एंडरसन को भगाने और गैस पीड़ितों के पुनर्वास के तरीके खोजने के लिए बने जहरीली गैस कांड आयोग ने अपनी रिपोर्ट इस वर्ष फरवरी में राज्य सरकार को सौंप दी है, लेकिन अभी तक इसे सार्वजनिक नहीं किया है। स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के मुताबिक रिपोर्ट पर अभी उच्च स्तर पर विचार चल रहा है। सीएम से चर्चा के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।

    कचरा साफ हो तो बने स्मारक

    करीब चार साल पहले तत्कालीन गैस राहत मंत्री बाबूलाल गौर ने यूनियन कार्बाइड पर स्मारक बनाने का आश्वासन दिया था। राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से इसके लिए 100 करोड़ रुपए की मांग भी की। स्मारक अब तक नहीं बना है।

    अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूका के 10 टन कचरे का सफल ट्रायल रन पीथमपुर में हो चुका है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल सुप्रीम कोर्ट को सौंपने जा रहा है। इसके बाद कोर्ट शेष बचे 335 मेट्रिक टन कचरे को भी पीथमपुर में नष्ट करने के आदेश दे सकता है। ऐसा होने पर यूका परिसर में स्मारक बनने का रास्ता साफ होगा।

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