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    मप्र को एशियाई शेर न देने पर गुजरात और भारत सरकार को नोटिस

    Published: Tue, 14 Nov 2017 11:18 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 07:19 AM (IST)
    By: Editorial Team
    lion 14 11 2017

    भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश को एशियाई शेर (बब्बर शेर) नहीं देने पर भारत सरकार और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। दोनों से 10 जनवरी 2018 तक जवाब मांगा गया है। कोर्ट ने आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को ये निर्देश दिए हैं।

    दुबे के वकील वरुण चौपड़ा ने बताया कि 15 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने एशियाई शेरों को मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर अभयारण्य में शिफ्ट करने का फैसला सुनाया था। फैसले के मुताबिक गुजरात सरकार को अक्टूबर 2013 तक शेर देने थे, लेकिन शेर नहीं दिए गए।

    उन्होंने बताया कि जून 2014 में दुबे की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई गई थी। जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की युगल पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। चौपड़ा ने बताया कि कोर्ट को सारी स्थिति बताई गई तो कोर्ट ने गुजरात और भारत सरकार के रवैए को गैर जिम्मेदाराना मानते हुए नोटिस जारी किया है।

    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने एशियाई शेरों को महामारी जैसी स्थिति से बचाने के लिए वर्ष 1991 में दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून ने इसके लिए प्रदेश के कूनो पालपुर के वातावरण को शेरों के अनुकूल बताया था।

    इसके आधार पर वर्ष 1993 में कूनो में शेरों की शिफ्टिंग का निर्णय लिया गया। वहां से 17 गांव भी शिफ्ट किए गए। शेरों की शिफ्टिंग के लिए बनाई गई विशेषज्ञों की समिति ने भी इसकी जरूरत बताई। इसके बाद 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में शिफ्टिंग के निर्देश भी दे दिए, लेकिन गुजरात सरकार लगातार अड़ंगे लगाती रही है।

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