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    इलाज कराते सड़ गया मजदूर का पैर, 7 महीने से बेड पर मरीज

    Published: Sun, 05 Feb 2017 06:26 PM (IST) | Updated: Mon, 06 Feb 2017 08:34 AM (IST)
    By: Editorial Team

    भोपाल। एक्सीडेंट के बाद पैर में फ्रैक्चर का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे रायसेन के एक मरीज को आराम मिलने की जगह पैर काटने की नौबत आ गई। रायसेन जिला अस्पताल व भोपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज के बाद भी मरीज का पैर सड़ने लगा है। इलाज में करीब साढ़े 5 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। रायसेन जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. केके लेडवानी ने मरीज को तीन बार राजधानी के अपेक्स अस्पताल में लाकर इलाज किया। हालत बिगड़ी तो हाथ खड़े कर दिए। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएम हेल्पलाइन व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से शिकायत की है।

    रायसेन के रहने वाले शिवराज गौर पिछले साल 28 अप्रैल को बाइक से जा रहे थे। रास्ते में उन्हें कार ने टक्कर मार दी। घायल होने पर परिजन उन्हें रायसेन के जिला अस्पताल ले गए। यहां उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. केके लेडवानी ने देखा। श्ािवराज के साले शिशुपाल गौर के मुताबिक डॉ.लेडवानी ने सलाह दी थी रायसेन जिला अस्पताल में इलाज कराओगे तो पैर कट जाएगा, इसलिए अपेक्स अस्पताल में भर्ती करा दो, हम वहीं पर इलाज कर देंगे। यहां मरीज को सात दिन भर्ती रखा। अस्पताल के 65 हजार रुपए के साथ ही दवाओं पर खर्च लगा।

    इसके बाद डॉ. लेडवानी ने कहा अब सिर्फ ड्रेसिंग होनी है, इसलिए रायसेन के जिला अस्पताल में भर्ती हो जाओ। वहां हम ड्रेसिंग कर दिया करेंगे। यहां मरीज के पैर की हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद डॉ. लेडवानी ने मरीज को फिर अपेक्स अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। यहां पर उन्होंने चोट वाली जगह जो काली पड़ गई थे उसे निकालकर जांघ की चमड़ी लगाई।

    इस दौरान फिर अस्पताल के चार्ज 70 हजार रुपए और 40 हजार की दवाएं लग गईं। खर्च बचाने के लिए फिर रायसेन जिला अस्पताल ले गए। यहां शिवराज को सवा महीने भर्ती रखा। पैर सड़ने लगा था, लेकिन अस्पताल में ठीक से देखभाल नहीं हो रही थी। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल आए एक नेता से शिकायत की तो डॉ. लेडवानी ने तीसरी बार मरीज को अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। यहां नौ दिन तक रखा। फिर बोले हमीदिया चले जाओ वहां इलाज करा दूंगा।

    हमीदिया में भी जब राहत नहीं मिली तो परिजनों ने मरीज को डिस्चार्ज करा लिया। करीब हफ्ते भर घर में रखने के बाद जबलपुर में जामदार हास्पिटल में दिखाया। यहां डॉक्टरों ने पैर काटने की सलाह दी। इसके बाद शिवराज को सीएम हाउस में इलाज के लिए 40 हजार रुपए की सहायता मिली तो उन्हें राजधानी के फ्रैक्चर अस्पताल में करीब 15 दिन पहले भर्ती कराया गया है। यहां के डॉक्टरों ने कहा कि पैर नहीं काटना पड़ेगा, पर पूरी तरह से ठीक होने में साल भर लगेंगे।

    इनका कहना है

    मुझे याद नहीं है आप किस मरीज के बारे में बात कर रहे हैं। मामला काफी पुराना हो सकता है।

    डॉ. केके लेडवानी हड्डी रोग विशेषज्ञ

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