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    बोनमेरो ट्रांसप्लांट से हो सकता है मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी का इलाज

    Published: Fri, 08 Dec 2017 04:06 AM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 10:21 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    भोपाल। मल्टिपल स्क्लिरोसिस एक दिमागी बीमारी है। इसमें मरीज को चलने-फिरने में मुश्किल होती है। शरीर के विभिन्न अंगों के बीच तालमेल कम हो जाता है। इस बीमारी का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं था। दवाओं से कुछ राहत मिल जाती थी।

    लेकिन फोर्टिस अस्पताल दिल्ली के हीमैटोलॉजिस्ट डॉ. राहुल भार्गव ने बोनमेरो ट्रांसप्लांट के जरिए इसका इलाज खोजा है। उन्होंने अब तक 23 मरीजों में बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया है। सभी मरीज ठीक हो गए हैं। डॉ. भार्गव यहां गांधी मेडिकल कॉलेज में पैथोलाजिस्टों व माइक्रोबायोलाजिस्टों की कांफ्रेस में शामिल होने आए थे।

    उन्होंने बताया कि इंडिया में प्रति लाख 5 से 20 मरीजों में यह बीमारी होती है। इस बीमारी के होने का अभी तक ठोस कारण पता नहीं चला है। हालांकि, दिमाग में न्यूरोन्स की संख्या अचानक बढ़ने की वजह से यह बीमारी होने के प्रमाण मिले हैं। डॉ.भार्गव ने बताया कि तीन साल पहले उन्होंने बोनमेरो ट्रांसप्लांट से इसकी शुरुआत की थी। अब तक 23 ट्रांसप्लांट किए हैं। सभी मरीज ठीक हैं।

    दवाओं पर हर साल पांच लाख रुपए तक खर्च

    उन्होंने बताया कि इस बीमारी की दवाएं हमेशा खानी पड़ती हैं। एक साल का दवाओं का खर्च करीब 5 लाख रुपए है। कई मरीज इतना ज्यादा खर्च उठा नहीं पाते। बोनमेरो ट्रांसप्लांट के बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। उसे दवाओं की तरूरत नहीं पड़ती। ट्रांसप्लांट ेमें 10 से 15 लाख रुपए तक खर्च है। डॉ. भार्गव ने बताया कि ट्रांसप्लांट की सुविधा धीरे-धीरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में भी शुरू हो रही है। इसमें आने वाला खर्च भी कम हो रहा है।

    यह हैं लक्षणः पैरों में कमजोरी, चलने में लड़खड़ाहट, आंखों में कम दिखना, बच्चों में मोटापा, इंफेक्शन, पेशाब रुक-रुक कर आना व विटामिन डी की कमी।

    पोस्टमार्टम से कई बीमारियों की मिल सकती है जानकारी

    मुंबई के पैथोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप वैेदेश्वर ने बताया कि कई लोगों की अचानक मौत हो जाती है। उनकी बीमारी का पता नहीं चल पाता। उनका पोस्टमार्टम कर कुछ जांचें कराई जाएं तो मौत के लिए जिम्मेदार बीमारी का पता का चल सकता है। इससे दूसरे मरीजों को मौत से बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि कई देशों में इसे अनिवार्य भी किया गया, पर यहां मौत के बाद परिजन नहीं चाहते कि बॉडी से छेड़छाड़ हो।

    आज जुटेंगे 900 विशेषज्ञ

    कांफ्रेंस छह दिसंबर से शुरू हुई है। इसमें शुक्रवार को देश-विदेश के करीब 900 विशेषज्ञ शामिल होंगे। जीएमसी की पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. रीनी मलिक ने बताया तक इस कांफ्रेंस में हर दिन अलग-अलग बीमारियों की जांच के नए तरीकों पर चर्चा की जा रही है। जांचों की क्वालिटी सुधारने के भी तरीके भी बताए जा रहे हैं।

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